डॉ. बीएस राजपूत
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14 जनवरी, वर्ष 1970 को लखनऊ में मेरा एक्सीडेंट हो गया था। मल्टीपल फ्रैक्चर थे। चार महीने हॉस्पिटल में रहा। इस दौरान सोचा कि मैं भी डॉक्टर बनूंगा। हाईस्कूल और इंटर भी सेकेंड डिवीजन आई। मेरे डॉक्टर बनने की ख्वाहिश पर नातेदार, मोहल्ले वाले मजाक उड़ाने लगे। कहते थे कि फर्स्ट क्लास वाले तो डॉक्टर बन नहीं पाते, सेकेंड में क्या डॉक्टर बनोगे।
मजाक का पात्र बना तो तय किया कि अब डॉक्टर ही बनूंगा। खूब मेहनत की और प्री मेडिकल टेस्ट (पीएमटी) में चयन हो हुआ। यह कहना है कि जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के विजिटिंग प्रोफेसर और देश के माने-जाने स्टेम सेल थैरेपिस्ट डॉ. बीएस राजपूत का। उनका कहना है कि हाईस्कूल और इंटर में अंक आने का मतलब यह कतई नहीं कि जिंदगी में तरक्की के रास्ते बंद हो गए।