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सीबीसीआईडी की बड़ी गलती

Fri, 01 Apr 2016 01:16 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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सीबीआई - फोटो : DEMO Pics
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कानपुर। रावतपुर में स्कूल के अंदर मासूम छात्रा से रेप और हत्या के 2010 के मामले में सीबीसीआईडी की बड़ी गलती सामने आई है। पता चला है कि इस केस के मुख्य अभियुक्त पीयूष वर्मा को जिस सिम की लोकेशन और सीडीआर के आधार पर सीबीसीआईडी ने अभियुक्त बनाया था, वह सिम उसके नाम है ही नहीं। सिम पोखरपुर चकेरी निवासी रवि कुमार के नाम से जारी है। अब अभियोजन पक्ष ने कोर्ट में रवि कुमार को तलब करने की अर्जी लगाई है। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने इस पर आपत्ति जताई है। अब कोर्ट में इसकी सुनवाई चार अप्रैल को होगी।
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27 सितंबर 2010 को रावतपुर स्थित भारती ज्ञान स्थली स्कूल में सातवीं की छात्रा से रेप हुआ था। खून ज्यादा बहने और इलाज न मिलने से उसकी मौत हो गई थी। मामले में स्कूल प्रबंधक चंद्रपाल, उसके बेटे मुकेश और पीयूष, बाबू संतोष कुमार अभियुक्त हैं। मामले की सुनवाई एडीजे प्रफुल्ल कुमार की कोर्ट में चल रही है। पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता अजय भदौरिया ने बताया कि पीयूष वर्मा को सीबीसीआईडी जांच के बाद उसके मोबाइल की कॉल डिटेल और लोकेशन के आधार पर अभियुक्त बनाया गया था।  अब जानकारी करने पर बीएसएनएल की ओर से कोर्ट में बताया गया कि पीयूष द्वारा प्रयोग किए जाने वाला सिम रवि कुमार के नाम है। इसलिए उन्होंने रवि को तलब करने की अर्जी लगाई है।
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घटनाक्रम पर एक नजर
27 सितंबर 2010 : छात्रा से रेप, खून बहने और इलाज न मिलने से मौत।
29 सितंबर : स्कूल प्रबंधक चंद्रपाल, बेटे मुकेश की गिरफ्तारी।
6 अक्तूबर : पुलिस ने खोला केस, मुन्ना लोध की गिरफ्तारी।
15 अक्तूबर : स्कूल प्रबंधक के बेटे पीयूष की गिरफ्तारी।
23 अक्तूबर : सीबीसीआईडी लखनऊ को जांच सौंपी।
9 नवंबर : डीएनए टेस्ट के लिए कोर्ट में 14 लोगों के ब्लड सैंपल, मुन्ना का पहले ही लिया जा चुका था।
24 दिसंबर : सीबीसीआईडी ने चंद्रपाल और मुकेश के खिलाफ चार्जशीट लगाई।
1 जनवरी 2011 : सीबीसीआईडी ने कोर्ट में अर्जी देकर मुन्ना को बेकसूर बताया।
11 जनवरी : डीएनए टेस्ट की रिपोर्ट के तहत पीयूष के खिलाफ चार्जशीट दाखिल।
27 सितंबर : एडीजे की कोर्ट में अभियुक्तों पर चार्ज फ्रेम।
19 अप्रैल : स्कूल प्रबंधक चंद्रपाल को हाईकोर्ट से जमानत।
मई 2012 : मुकेश को हाईकोर्ट से जमानत मिली।
मई 2014 : बाबू संतोष मिश्रा को हाईकोर्ट से जमानत मिली।
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