डेंगू का इलाज करने वाले डॉक्टर भी अब मच्छरों की चपेट में आकर बीमार पड़ने लगे हैं।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से संबद्ध हैलट हॉस्पिटल के मेडिसिन विभाग के दो और बाल रोग विभाग के एक जूनियर डॉक्टर को गंभीर हालत में अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया है। इनमें से एक में डेंगू की पुष्टि हो चुकी है। कॉलेज के कई जूनियर डॉक्टर और मेडिकल स्टूडेंट डेंगू से पीड़ित हैं। इधर, शुक्रवार को भी भारी संख्या में डेंगू के लक्षणों वाले मरीज हैलट और उर्सला की ओपीडी में पहुंचे।
मेडिसिन विभाग के जूनियर डॉक्टर प्रथम वर्ष मेहताब आलम को कई दिनों से बुखार था। इसके बाद भी वह वार्ड में काम कर रहे थे। चार दिनों पहले ज्यादा हालत बिगड़ी तो उन्हें आईसीयू में भर्ती कराया गया। वह आजमगढ़ के बिलरियागंज के रहने वाले हैं। मेडिसिन विभाग के ही जूनियर डॉक्टर प्रथम वर्ष योगेश की भी हालत गंभीर बनी हुई है। डॉ. योगेश को भी हैलट आईसीयू में भर्ती किया गया है।
बाल रोग विभाग के एक जूनियर डॉक्टर को भी डेंगू की आशंका में आईसीयू में भर्ती कराया गया है। तीन एमबीबीएस स्टूडेंटों को शुक्रवार को आईसीयू से छुट्टी दी गई। मेडिसिन विभाग की नोडल अधिकारी प्रो. रिचा गिरी ने कहा कि डॉ. मेहताब में डेंगू की पुष्टि हुई है। डॉ. योगेश की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। जूनियर डॉक्टरों की हालत में तेजी से सुधार हो रहा है।
हॉस्टलों के आसपास गंदगी का अंबार
मेडिकल स्टूडेंटों और जूनियर डॉक्टरों के आवासों के आसपास गंदगी का अंबार लगा हुआ है। भवन जर्जर है और मच्छरों से बचाव के लिए न तो फागिंग हो रही है और न ही छिड़काव। जूनियर डॉक्टरों और मेडिकल स्टूडेंटों में इसे लेकर काफी गुस्सा है। बीमारी के कारण कई मेडिकल स्टूडेंट छुट्टी लेकर घर चले गए हैं।