संक्रमितों का इलाज करने में कई डॉक्टर भी कोरोना की चपेट में आ गए थे। इनका कोरोना संक्रमण तो निगेटिव हो गया लेकिन सांस में दिक्कत है। इसके साथ ही कुछ डॉक्टरों में निगेटिव होने के बाद निमोनिया भी है।
कोरोना निगेटिव होने के बाद भी कुछ डॉक्टरों की सांस फूल रही है। संक्रमितों का इलाज करने में जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज और स्वास्थ्य विभाग के कई डॉक्टर कोरोना की चपेट में आ गए थे। इनका कोरोना संक्रमण तो निगेटिव हो गया लेकिन सांस में दिक्कत है। इसके साथ ही कुछ डॉक्टरों में निगेटिव होने के बाद निमोनिया भी है।
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जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के पुरातन छात्र देहात के एसीएमओ डॉ. विवेक कटियार 16 अप्रैल को हैलट में भर्ती हुए थे। निगेटिव रिपोर्ट आने के बाद उन्हें 28 अप्रैल को हैलट से डिस्चार्ज कर दिया गया, लेकिन निमोनिया उसी तरह बना रहा। बाद में डॉ. विवेक को जीटी रोड स्थित एक नर्सिंगहोम में भर्ती कराया गया। यहां 17 मई को मौत हो गई थी।
डॉ. विवेक के छोटे भाई और मेडिकल कालेज के सीनियर सर्जन डॉ. विकास कटियार भी कोरोना संक्रमित हो गए थे। उनका कहना है कि संक्रमण ठीक हो गया लेकिन अभी तक सांस की तकलीफ बनी हुई है। इस वक्त हैलट में कोविड ड्यूटी भी कर रहे हैं। कॉलेज के एक सीनियर चेस्ट फिजिशियन कोरोना की पिछली लहर में संक्रमित हुए थे, लेकिन अभी तक सांस में तकलीफ बनी हुई है।
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इसी तरह स्वास्थ्य विभाग के कई अधिकारी कोरोना की चपेट में आए। आरआरटी टीम प्रभारी डॉ. एसएल वर्मा को हालत अत्यधिक बिगड़ने पर निजी अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना ने डैमेज कितना किया है, इससे तय होता है कि तकलीफ कब तक रहेगी।