आयरलैंड निवासी एक व्यक्ति अपने परदादा की कब्र ढूंढने के लिए सात समंदर पार कर शहर पहुंचा। उसका कहना था कि वह अपने परदादा की कब्र एक बार देखना चाहता है। उसके परदादा ईस्ट इंडिया कंपनी में सार्जेंट के पद पर तैनात थे। यहीं पर उनका निधन होने पर दफना दिया गया था।
सोमवार को दोपहर में यूनिवर्सिटी लिमिरक आयरलैंड में तैनात डॉ. क्लिफ नोलन तहसीलदार अनिल कुमार के पास पहुंचा। उसने कहा कि उसके परदादा पैट्रिक नोलन ईस्ट इंडिया कंपनी में सार्जेंट थे। 29 अप्रैल 1860 को यहीं पर तैनाती के दौरान उनका निधन हो गया था।
वह अपने परदादा की कब्र ढूंढने के लिए आया है। एक बार कब्र देखना चाहता है। अगर तहसील में इसका कोई रिकार्ड हो तो उसे बताया जाए। तहसीलदार ने कहा कि इस तरह का कोई रिकार्ड तहसील में नहीं है। हालांकि तहसीलदार ने एक बाबू को बुलाकर क्लिफ नोलन को गोरा कब्रिस्तान लेकर जाने को कहा।
तहसीलदार ने क्लिफ नोलन को बताया कि हो सकता है कि गोरा कब्रिस्तान में ही पैट्रिक नोलन की कब्र मिल जाए। यदि वहां कब्र नहीं मिली तो भी शायद वहां से उनके बारे में कोई जानकारी मिल जाए। इस पर क्लिफ नोलन गोरा कब्रिस्तान चले गए। हालांकि देरशाम तक डॉ. क्लिफ नोलन के परदादा की कब्र मिलने की सूचना नहीं मिली है।