कानपुर में हृदय रोग संस्थान से डिप्लोमा इन कार्डियोलॉजी (डिप कार्ड) को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया (एमसीआई) ने 35 साल बाद मान्यता दी। शुक्रवार को स्वास्थ्य मंत्रालय ने मेडिकल कॉलेज प्राचार्य को पत्र भेजकर इसकी जानकारी दी। इससे डिप कार्ड करने वाले करीब डेढ़ सौ डॉक्टरों को हृदय के मरीजों का इलाज करने का रास्ता साफ हो गया है।
हृदय रोग संस्थान (कार्डियोलॉजी) में 1974 में डिप कार्ड कोर्स शुरू हुआ था। हर साल करीब 15 डॉक्टरों को यह कोर्स कराया जाता था, पर इस कोर्स को एमसीआई ने मान्यता देने से इनकार कर दिया था। मान्यता न मिलने की वजह से 1983 में यह कोर्स बंद हो गया था।