मानसिक रूप से परेशान करने का आरोप
डॉ. अभिषेक स्वर्णकार ने अपनी पोस्ट में लिखा कि यदि वह भविष्य में आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठाते हैं, तो इसके लिए सीएमएस डॉ. संदीप गुलाटी, ईएमओ डॉ. रविंद्र साहू और बाबू दयाराम जिम्मेदार होंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि उन पर लगातार त्यागपत्र देने का दबाव बनाया जा रहा है और पिछले 05 माह से उनका वेतन भी रोक दिया गया है।
डॉक्टर का कहना है कि अस्पताल में एक्स-रे मशीन उपलब्ध नहीं है और उनकी लिखी दवाएं मरीजों को नहीं दी जातीं, जिससे उनकी कार्यशैली और छवि प्रभावित हो रही है। सूचना पर पहुंचे बकेवर थाना प्रभारी विपिन मलिक ने डॉक्टर से बातचीत कर स्थिति संभाली।
सीएमएस बोले- बायोमेट्रिक में नहीं दर्ज की उपस्थिति, आरोप निराधार
दूसरी ओर, अस्पताल प्रशासन ने डॉक्टर द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। सीएमएस डॉ. संदीप गुलाटी ने स्पष्ट किया कि 01 फरवरी 2026 से शासन के निर्देशानुसार सभी कर्मियों की उपस्थिति बायोमेट्रिक मशीन से दर्ज हो रही है।
डॉ. स्वर्णकार ने पिछले 05 महीनों से न तो बायोमेट्रिक पर उपस्थिति दर्ज कराई और न ही रजिस्टर में हस्ताक्षर किए, जिसके कारण उनका वेतन जारी नहीं हो सका। उन्होंने बताया कि डॉक्टर बिना बताए 04 दिन अनुपस्थित रहने के बाद बैकडेट में हस्ताक्षर कर रहे थे, जिस पर आपत्ति जताई गई थी। पूरे मामले की रिपोर्ट जिलाधिकारी और स्वास्थ्य महानिदेशक को भेज दी गई है।