कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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कानपुर के उर्सला में मेडिसिन का स्पेशिएलिटी कोर्स डीएनबी कर रही संक्रमित महिला डाॅक्टर अपनी स्थिति और लक्षणों को सामने रखकर मर्ज का इलाज ढूंढने में जुटी हैं। संक्रमित होने के बाद वह घबराई नहीं और न ही अवसाद में आकर पढ़ाई बंद की बल्कि उनका जज्बा और बढ़ा।
वह मेडिकल लिटरेचर के सहारे इसका इलाज में ढूंढने में जुट गई हैं। इसके साथ ही उन्होंने अपनी हॉबी को इम्युनिटी बढ़ाने का अस्त्र बना लिया है। मानसिक शक्ति बढ़ाने के लिए योगिक क्रियाओं और संगीत का भी सहारा ले रही हैं। उर्सला की महिला डाक्टर डीएनबी का कोर्स अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. शैलेंद्र तिवारी के अंडर में कर रही हैं।
डॉ. तिवारी ने शहर के पहले कोरोना रोगी का उपचार किया था। महिला डाॅक्टर का इलाज भी उन्हीं के अंडर में चल रहा है। उनका कहना है कि नई गाइड लाइन के मुताबिक रोगी को उसकी पसंद की चीज दी जाए। अगर किसी को पुस्तक पसंद है तो वह इस दौरान मनपसंद किताबें पढ़े।
इससे रोगी मानसिक रूप से मजबूत रहता है। आत्मबल से रिकवरी तेज हो जाती है। महिला डाॅक्टर आइसोलेशन सेंटर में अपने रूटीन के हिसाब से पढ़ाई कर रही हैं। उनकी तबियत में लगातार सुधार हो रहा है। महिला डाॅक्टर अपने गाइड से कोर्स के विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा भी करती हैं।