सुप्रीमकोर्ट के आदेश को सख्ती से लागू करने के लिए देर ही सही प्रशासन और संबंधित अफसरों को सुध आ ही गई। सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि सड़क दुर्घटना में घायलों का इलाज करने से कोई भी पंजीकृत सार्वजनिक चिकित्सालय या निजी अस्पताल इनकार नहीं कर सकता। न ही घायल को भर्ती करने और उसका इलाज करने के लिए पैसे की मांग कर सकेगा।
बांदा पुलिस अधीक्षक ने सीएमओ को लिखे पत्र में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आधार पर हाईकोर्ट के सहायक निबंधक द्वारा जारी आदेश का हवाला दिया है। इसमें कहा है कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय यह सुनिश्चित करे कि पंजीकृत सार्वजनिक चिकित्सालय या निजी अस्पतालों में सड़क में घायल व्यक्तियों को ‘वाई स्टैंडर्स’ या गुड सेमिटन द्वारा ले जाया जाए तो उसका इलाज और भर्ती करने से अस्पताल इनकार नहीं करेंगे। न ही घायलों के पंजीकरण और भर्ती के लिए कोई भुगतान की मांग करेंगे।
किसी पीड़ित का उपचार करने के लिए पैसा जमा करने के लिए बात नहीं करेंगे। न ही उनकी इच्छा के विरुद्ध उनका नाम, पता, मोबाइल नंबर आदि बताने को मजबूर करेंगे। पुलिस अधीक्षक ने अपने पत्र में कहा है कि किसी डाक्टर द्वारा सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के उपरोक्त आदेशों पर अमल नहीं किया जाता तो भारतीय चिकित्सा परिषद (व्यवसायिक, आचार्य, शिष्टाचार और भौतिक) विनियम अध्याय-7 के अंतर्गत व्यवसायिक कदाचार माना जाएगा। साथ ही उस डाक्टर के विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई की जाएगी।