कानपुर जिला उपभोक्ता फोरम ने नसबंदी के बाद भी बेटी होने पर डॉक्टर से पांच लाख रुपये देने को कहा है। फोरम ने कहा है कि इस राशि से बेटी के नाम एफडी कराई जाए। यह राशि मां अपनी बेटी की परवरिश और पढ़ाई के लिए समय-समय पर फोरम की अनुमति से निकाल सकेगी। पांच हजार रुपये मुकदमा खर्च देने को भी कहा है।
गांधीनगर निवासी सीता ने पनकी स्थित मेरी गोल्ड हास्पिटल की डॉ. अप्सरा सक्सेना के खिलाफ 11 जुलाई 2011 को मुकदमा दाखिल किया था। इसमें कहा था कि शादी के बाद उसके दो बेटी और दो बेटे हुए। पति बिजली मैकेनिक है। खर्च न चलने पर उसने और बच्चे न होने देने का फैसला लेते हुए 27 जनवरी 2011 को मेरी गोल्ड हास्पिटल में डॉ. अप्सरा से अपनी नसबंदी कराई।
18 मार्च 2011 को तबियत खराब होने पर न्यू सेवाधाम हास्पिटल आचार्य नगर में दिखाया तो डॉक्टर ने बताया कि वह गर्भवती है। डफरिन अस्पताल में भी जांच कराने पर गर्भवती होने की पुष्टि हुई। इस मामले में नर्सिंग होम की तरफ से फोरम में कहा गया कि उनके यहां अप्सरा नाम की कोई डॉक्टर नहीं है। न ही उनके हास्पिटल में आपरेशन हुआ।
महिला चेकअप के लिए आई थी। उसे बताया था कि आपरेशन के बाद और पहले क्या सावधानी बरतनी है। फोरम अध्यक्ष डॉ. आरएन सिंह, सदस्य पुरुषोत्तम सिंह और सुधा यादव ने मंगलवार को फैसला सुनाते हुए कहा कि विपक्षी का बयान विरोधाभाषी है। अस्पताल की डिस्चार्ज स्लिप से यह स्पष्ट हो रहा है कि आपरेशन हुआ था।