कानपुर। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अधीन संचालित कृषि विज्ञान केंद्र दिलीप नगर में फसल अवशेष प्रबंधन पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन हो गया। केंद्र के वरिष्ठ विज्ञानी डॉ. खलील खान ने फ़सल अवशेषों से बनाए जा सकने वाली कंपोस्ट को बनाने की विधि के बारे में विस्तार से बताया।
उन्होंने बताया कि खेत में पराली को आग लगाने से मिट्टी के सूक्ष्म जीवों और केंचुओं संख्या को नुक़सान होता। मिट्टी की उर्वरता पर बुरा प्रभाव पड़ता है। फ़सल अवशेष प्रबंधन के अन्य विकल्प हैं। पराली से बायो गैस उत्पादन, मशरूम उत्पादन, पैकिंग सामग्री के रूप में फसल अवशेषों के उपयोग आदि पर भी प्रकाश डाला।
वरिष्ठ विज्ञानी डॉ. राजेश राय और डॉ. अरुण कुमार सिंह ने बताया कि जल संरक्षण तथा पराली न जलाने के लिए किसान खुद भी प्रेरित हों। गेहूं की बुवाई में इस्तेमाल होने वाली मृदा संरक्षण केंद्रित मशीनों जैसे ज़ीरो ट्रिल ड्रिल, हैप्पी सीडर, सुपर सीडर के बारे में बताया गया। इस मौके 25 किसानों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। उन्हें प्रमाण पत्र देकर सम्मानित भी किया गया।