रक्षा सामग्री एवं भंडार अनुसंधान तथा विकास स्थापना (डीएमएसआरडीई) कानपुर ने जवानों के लिए सबसे सुरक्षित बुलेट प्रूफ जैकेट बनाने में सफलता हासिल की है। जवानाें की नई ढाल पर स्टील, स्टेनलेस स्टील की गोलियां बेअसर होंगी और जैकेट में लगने के बाद टूटकर बिखर जाएंगी। इसका भार करीब 10 किलो है जो हल्की जैकेट की श्रेणी में आती है। इस जैकेट पर विदेशी मशीन गनों, स्नाइपर की गोलियां बेअसर होंगी। इस तरह की गोलियां नाटो देश, यूरोप, चीन, पाकिस्तान और अमेरिका की सेना इस्तेमाल करती है।
बीआईएस (भारतीय मानक ब्यूरो) संख्या 17051 के लेवल छह के अनुरूप बुलेट प्रूफ जैकेट तैयार की गई है। यह लेवल सबसे ज्यादा कठिन माना जाता है। जवानों को स्टील की गोलियाें से बचाने के लिए इसे तैयार किया गया है। यह देश में अब तक की पहली मोनोलिथिक प्लेट से बनी सबसे हल्की लेवल छह बुलेट प्रूफ जैकेट है। यह बुलेट प्रूफ जैकेट 7.62 गुणा 54 आर एपीआई राउंड की गोली को रोकने में सक्षम है। इस जैकेट का फ्रंट हार्ड आर्मर पैनल (एचीएप) 40 किलोग्राम (आईसीडब्ल्यू) और 43 किलोग्राम (स्टैंडअलोन) की एरियल डेंसिटी से भी कम है जो बीआईएस के मानकों से भी हल्का है।