बांदा में खेत-खलिहान, खुले मैदान या सड़कों के फुटपाथ तक ही पौधरोपण को सीमित करना दुरुस्त नहीं। घर की ड्योढ़ी से लेकर बेडरूम तक भी पौधों की हरियाली होनी चाहिए। ऑक्सीजन की सौगात गमलों में लगे पौधे भी कम नहीं देते। उधर, जिला प्रशासन ने पौधरोपण को धार्मिक भावनाओं से जोड़ते हुए ‘पेड़ प्रसाद’ अभियान शुरू किया है।
मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे व चर्च के जिम्मेदारों और धर्मगुरुओं के साथ बैठक कर इस पर सहमति बनाई है। घरों के अंदर फूल-फुलवारी और हरियाली के प्रति दिलचस्पी पैदा करने को डीएम हीरालाल ने धर्मगुरुओं की मदद लेने का अभियान शुरू किया है। रविवार को शहर के विभिन्न मंदिर, मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारा आदि के संचालकों/धर्मगुरुओं की बैठक में कहा कि घर में मिट्टी के गमले, अनुपयोगी बर्तन आदि में पौधे लगाने से ऑक्सीजन लगातार मिलेगी।
साथ ही सुख, शांति और समृद्धि आएगी। उन्होंने कहा कि धर्मस्थलों पर धर्मगुरु/संचालक श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में पौध प्रदान करें। उन्हें प्रेरित करें कि इसे अपने घर, द्वार, परिसर में लगाएं। प्लास्टिक का प्रयोग पूरी तरह बंद करें। डीएम ने इसके लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किए हैं। उन्हें निर्देश दिया है कि धर्मस्थलों के प्रबंधकों से संपर्क कर इस अभियान को परवान चढ़ाएं। धार्मिक स्थलों के आसपास पौध बिक्री की व्यवस्था कराएं।