डॉ. हरिदत्त नेमी
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सीएमओ डॉ. हरिदत्त नेमी ने निलंबित होने के बाद डीएम जितेंद्र प्रसाद सिंह के खिलाफ मुंह खोला। यह भी कहा कि वह न्याय के लिए हाई कोर्ट जाएंगे। सीएसए स्थित आवास पर पत्रकारों से बातचीत में डीएम पर दलित विरोधी होने का आरोप लगाया। यह भी कहा कि डीएम उनसे पैसा मांगते रहे और सिस्टम में आने की सलाह देते रहे। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ काम किया तो उनका निलंबन कर दिया गया। विभागीय अधिकारियों को भी उन्होंने स्थिति बताई थी लेकिन कुछ नहीं हुआ।
डीएम और सीएमओ के बीच तनातनी का माहौल गुरुवार को निष्कर्ष पर पहुंच गया। शासन ने सीएमओ डॉ. नेमी को निलंबन का आदेश जारी कर दिया। निलंबन के बाद सीएमओ डॉ. नेमी खुलकर डीएम और अपने दूसरे विरोधियों के खिलाफ आ गए। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि उत्पीड़न के कारण छह महीने में उनका 10 किलो वजन घटा है। वह डिप्रेशन में चले गए। इस पर उन्होंने डीएम, एसीएमओ डॉ. सुबोध प्रकाश, डॉ. आरएन सिंह, फाइनेंस अधिकारी वंदना सिंह और जेएम फार्मा को निशाने पर रखा। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को भी उन्होंने उत्पीड़न की सारी बात बताई थी। अब सब कोर्ट में जाकर जवाब दें।
पत्रकारों से बातचीत करते पूर्व सीएमओ
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निलंबन को एकतरफा कार्रवाई करार देते हुए उन्होंने कहा कि पहले विभागीय जांच होनी चाहिए। जांच में गड़बड़ी पाए जाने पर कार्रवाई होती है लेकिन ऐसा नहीं किया गया। डॉ. नेमी ने बताया कि उन्होंने 16 दिसंबर 2024 को सीएमओ का कार्यभार संभाला था। डीएम ने हर बैठक में उनसे अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। वह दलित समाज से आते हैं तो दलित सूचक गंदे शब्द कहे। इससे उनका दम घुटता रहा। उनके सिर पर पुश किया जिससे माथा माइक से टकरा गया। उनका आरोप है कि डीएम बराबर पैसे की डिमांड करते रहे। जेएम फार्मा को गलत कार्य विस्तार दिया गया। उस सामान के भुगतान के लिए दबाव बनाया जाता रहा जो सप्लाई ही नहीं किया गया।
जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह
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उन्होंने कहा कि भुगतान न करने पर जीएम फार्मा, पद से हटाए जाने पर दोनों एसीएमओ डीएम के साथ एक हो गए। डॉ. सुबोध के खिलाफ भाजपा और आरएसएस के लोगों ने भी शिकायत की। उन्होंने पद से हटाए जाने के बाद 30 नर्सिंगहोमों का रजिस्ट्रेशन कर दिया। उनकी हार्ड और सॉफ्ट कॉपी भी नहीं है। वह सप्लाई से भी जुड़े रहे। जेएम फार्मा को छुट्टी के दिन 15 दिन का विस्तार दिया। यह भी कहा कि उनके कार्यकाल में संचारी रोग अभियान में जिला प्रदेश में प्रथम रहा है। वह विभाग को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने का प्रयास कर रहे थे, उलटे उन्हीं पर कार्रवाई हो गई।