दिवाली से एक दिन पूर्व नरक चतुर्दशी का पर्व आज मनाया जाएगा। आचार्य उमाशंकर ने बताया कि विष्णु पुराण में एक कथा मिलती है जिसके अनुसार इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर नाम के राक्षस का वध किया था।
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साथ ही काली पुराण में भी एक कथा मिलती है जिसमें मां काली ने इस दिन अपने कामाख्या रूप में हिरण्वाक्ष के वंशज नरकासुर का वध किया था। इस कारण इसे काली चौदस भी कहते हैं। नरक चतुर्दशी के दिन घर की सभी नकारात्मक ऊर्जा को खत्म करने के लिए कूड़ा आदि हटाया जाता है।
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नरक चतुर्दशी पर सुबह सात से नौ बजे और शाम छह से आठ बजे तक दीप प्रज्ज्वलित करना फलदायी रहेगा। इसमें एक घी का दीपक भगवान के स्थान पर रखे। तेल के दीपक को दक्षिण-पश्चिम स्थान पर रखा जाता है।
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नरक चतुर्दशी पर ये करें
- नरक चतुर्दशी के निमित्त पूर्वाभिमुख होकर चार बत्तियों वाले दीप प्रज्वलित करना चाहिए।
- प्रदोष काल के बाद ही इसे प्रज्वलित करना उत्तम माना जाता है।
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- यम तर्पण को ध्यान में रखते हुए प्रदोष काल के समय दक्षिण दिशा की अोर मुख कर जल में काला तिल, कुश देकर यमदेव को स्मरण करना चाहिए।
- उस स्थान पर जल छिड़क देना चाहिए. यम देव के निमित्त ही दीप प्रज्वलित करना चाहिए।
हर जगह जलाएं दीप
प्रदोष काल के समय तिल के तेल से भरे सुपूजित 14 दीपक ब्रह्मा, विष्णु व महेश के निमित्त पूजन कक्ष, मठ, बाग-बगीचे, जल श्रोत के समीप, गली-कूचे, नजर दिशाएं, पशुशाला में स्थापित करना चाहिए। बचे दीप सूने स्थान पर रखना चाहिए। मान्यतानुसार ऐसा करने से यमदेव प्रसन्न होते हैं।