पति-पत्नी का रिश्ता प्रेम व विश्वास का होता है और यही दोनों तत्व रिश्ते में नहीं हैं तो दोनों अपना स्वतंत्र जीवनयापन करें। न किसी को अपनी जान का खतरा हो और न ही सुरक्षा की चिंता। इसी टिप्पणी के साथ पारिवारिक न्यायालय की अपर प्रधान न्यायाधीश रेखा सिंह ने 23 साल पहले हिंदू युवक व ईसाई युवती के बीच हुए विशेष विवाह के मामले में तलाक का आदेश जारी कर दिया।
शास्त्रीनगर निवासी हिंदू युवक ने सितंबर 2001 को ईसाई युवती के साथ कोर्ट मैरिज की थी। वर्ष 2022 में पति ने पत्नी से तलाक के लिए कोर्ट में वाद दाखिल कर दिया। इसमें कहा कि शादी से पहले युवती ने हिंदू धर्म अपनाने और उसी के तहत पूजा-पाठ करने का विश्वास दिलाया था।
शादी के पांच साल तक सबकुछ ठीक चलता रहा लेकिन इसके बाद अचानक पत्नी के मायके वालों का ज्यादातर घर आना-जाना शुरू हो गया और उसने ईसाई धर्म के अनुसार कपड़े पहनने शुरू कर दिए। घर में ईसाई धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए बैठकें होने लगीं।
विरोध किया तो पत्नी ने उस पर भी धर्म परिवर्तन का दबाव डाला। घर के कामकाज बंद कर दिए, खाना आदि देना भी बंद कर दिया। रिश्तेदार के घर रहने चली गई। बाद में समझौते के नाम पर मकान अपने नाम करने का दबाव डालने लगी।