कानपुर। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह का जिले में करीब डेढ़ साल का कार्यकाल कई अलग-अलग वजहों से चर्चा में रहा। जनवरी 2025 में जिले की कमान संभालने के बाद उन्होंने शुरुआत ही औचक निरीक्षण और छापेमारी से की। इस दाैरान सीएमओ से विवाद सुर्खियों में रहा। मामला शासन तक पहुंचा था।
डीएम ने जनसुनवाई और जनता दर्शन में आने वाले फरियादियों की समस्याओं को प्राथमिकता दी। इस वजह से कलक्ट्रेट में जनता दर्शन से लेकर तहसीलों के संपूर्ण समाधान दिवस में फरियादियों की भीड़ जुटती थी। छोटी खामियां तुरंत निस्तारित कराते थे। ऑटो चालक के सम्मान से लेकर स्कूली बच्चों की फीस की समस्या, सुनने में परेशानी वाले लोगों को कान की मशीन उपलब्ध कराने और सरकारी अभिलेखों में मृत दर्ज व्यक्ति के दस्तावेज सही कराने जैसे मामलों में जिलाधिकारी ने हस्तक्षेप किया। वर्षों से लंबित मामलों को डीएम ने सीधे हस्तक्षेप कर निस्तारण कराया। यही नहीं जनता दर्शन में आने वाले लोगों के लिए चाय, बिस्कुट और मट्ठे की व्यवस्था भी चर्चा में रही।
वहीं, कार्यकाल का सबसे चर्चित समय डीएम और सीएमओ डॉ. हरि दत्त नेमी के बीच विवाद रहा। औचक निरीक्षण, सीएमओ कार्यालय से वीडियो बनाए जाने और उसके बाद नोटिस जारी होने से शुरू हुआ विवाद इतना बढ़ा कि सीएमओ ने डीएम के खिलाफ प्रेस कांफ्रेंस तक कर दी। इसके बाद शासन स्तर से कार्रवाई हुई और डॉ. हरि दत्त नेमी को निलंबित कर डॉ. उदय नाथ को कानपुर का सीएमओ बनाया गया। मामला हाईकोर्ट पहुंचने के बाद विवाद और गहरा गया। एक तरफ आदेश लेकर पहुंचे हरि दत्त नेमी और दूसरी ओर कार्यालय की कुर्सी पर बैठे उदयनाथ के बीच अधिकार को लेकर टकराव की स्थिति आ गई थी। मामला अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई तक पहुंच गया। बाद में शासन ने स्थानांतरण आदेश रद्द करते हुए निलंबित डॉ. हरि दत्त नेमी को फिर कानपुर का दायित्व सौंप दिया जबकि डॉ. उदय नाथ को श्रावस्ती वापस भेज दिया गया। यह प्रकरण डीएम के पूरे कार्यकाल में सबसे ज्यादा सुर्खियों में रहा।
अधिकारियों से खींचतान भी रही चर्चा में
डीएम के कार्यकाल में अधिकारियों के साथ अंदरूनी खींचतान की चर्चाएं भी लगातार होती रहीं। कुछ अधिकारियों के लंबे अवकाश पर जाने और कुछ के तबादले को भी इसी कड़ी से जोड़कर देखा गया। पूर्व समाज कल्याण अधिकारी का वायरल ऑडियो भी काफी चर्चित रहा। आबकारी विभाग के कामकाज को लेकर भी डीएम स्तर से कई बार नोटिस जारी हुए लेकिन अपेक्षित सुधार नहीं होने की बात सामने आती रही।