कानपुर साउथ। बर्रा-7 में पिछले कई दिनों से हैंडपंप और सबमर्सिबल पंपों से झागदार मटमैला पानी आ रहा है, जिसके चलते करीब आधा सैकड़ा बच्चों को उल्टी दस्त तो बड़ों को एलर्जी की शिकायत हो रही है। लोगों के सामने पीने के पानी का गंभीर संकट है।
जल कल विभाग ने यहां टैंकर भिजवाया लेकिन उसका पानी पर्याप्त नहीं पड़ा। वार्ड-74 के पार्षद मनीष शर्मा के मुताबिक अधिकारियों ने सुबह-शाम टैंकर भेजकर जलापूर्ति का आश्वासन दिया है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को कई मर्तबा फोन करने के बावजूद कोई भी झांकने तक नहीं पहुंचा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द ही समस्या का समाधान न हुआ तो अफसरों की टेबल पर गंदा पानी लेकर प्रदर्शन करेंगे।
पानी दे रहे इकलौते हैंडपंप पर लगती है लाइन
बर्रा आठ के ई वन ब्लाक में एक सप्ताह से पेयजल संकट है। क्षेत्र की कुसुम, माया, सोमवती, शारदा, आरती आदि ने बताया कि नाली और सड़क निर्माण के लिए चल रही खुदाई से वॉटर लाइन लीकेज हैं। इससे जलापूर्ति प्रभावित है। क्षेत्र में एक हैंडपंप से ही पानी आ रहा है। इस कारण वहां भी बाल्टियों की लाइन लगी रहती है।
नलों से आ रहा गंदा पानी
जूही विनोबा नगर में नलों से गंदा और बदबूदार पानी आ रहा है। स्वर्ण कुमार, अजीत, गुलशन आदि ने बताया कि डिपो के पास तीन जगह लाइन लीकेज है। इस कारण सीवर का पानी उसमें आ रहा है। वहीं जूही राखी मंडी में भी हैंडपंपों से पीला पानी आ रहा है। इसी तरह बाबूपुरवा वार्ड-54 की एनएलसी कालोनी,अजीतगंज, बगाही और बेगमपुरवा में भी सप्लाई नहीं हो रही है।
नहीं बढ़ा गंगा का जलस्तर जीएम ने किया निरीक्षण
कानपुर। हरिद्वार से पानी छोड़ने के दो दिन बाद भी शनिवार को गंगा का जलस्तर नहीं बढ़ा। जलकल विभाग के महाप्रबंधक जवाहर राम ने भैरोघाट पंपिंग स्टेशन जाकर स्थिति का जायजा लिया। सिंचाई विभाग के अफसरों से बात कर गंगा में पानी छोड़ने पर जोर दिया। भैरोघाट पंपिंग स्टेशन के पास गंगा का जलस्तर 31 मार्च से 356.2 फीट है, जबकि जलापूर्ति के लिए न्यूनतम जलस्तर 357 फीट होना चाहिए। पिछले महीने की 12 तारीख से जलस्तर न्यूनतम स्तर से नीचे लुढ़कना शुरू हुआ।
31 मार्च से जलस्तर 356.2 फीट के स्तर पर बरकरार है। जरूरत के मुताबिक जलापूर्ति न होने से शहर में पेयजल संकट गहराता जा रहा है। उधर, सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता अवधराज यादव ने बताया कि बैराज को रोज 4000 क्यूसेक पानी मिल रहा है और इतना ही पानी बैराज से छोड़ा जा रहा है। भैरोघाट पंपिंग स्टेशन को पर्याप्त पानी उपलब्ध कराया जा रहा है।
नदी सूखी तो पंपिंग स्टेशन को लगी जंग
कानपुर (ब्यूरो)। जिस पंपिंग स्टेशन से कई गांवों की खेती की सिंचाई की जाती थी नोन नदी के सूखने के बाद उसमें भी जंग लगने लगी है। इसके अलावा नदी के पानी को गांवों तक पहुंचाने वाली छोटी नहर का भी अस्तित्व खत्म होने की कगार पर है। बिठूर में नोन नदी के किनारे ऊंचाई पर बसे गांवों में खेती के लिए सिंचाई विभाग ने 1966 में बड़ा पंपिंग स्टेशन बनवाया था। यहां 100 और 30 हार्स पावर की दो मोटर लगी थीं।
नदी में पाइप डालकर पानी नहर में लाया जाता था और नहर से पानी गांव-गांव जाता था। बरहट बांगर गांव के श्याम लाल कहते हैं कि जिस समय पंपिंग स्टेशन लगा था, गांवों की हरियाली देखते ही बनती थी। शहर गए लोग वापस आने लगे थे। अब नदी सूखने के बाद यहां के किसानों की स्थिति फिर खराब होने लगी है।
अब कोई नहीं पूछता दुर्गा प्रसाद को
सिंचाई विभाग ने पंपिंग स्टेशन के संचालन और रखवाली के लिए दुर्गा प्रसाद को रखा था। कुछ साल पहले तक ठाठ थे। लोग उनके पास पानी के लिए पैरवी करने पहुंचते थे। पर अब दुर्गा प्रसाद को पूछने कोई नहीं आता।