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कालाधन हाेने के शक पर जब्त की गई थी डेढ़ कराेड़ से अधिक की रकम, अब ये सच आया सामने

Tue, 28 May 2019 06:36 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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नोटो की होती गिनती ( फाइल फोटो ) - फोटो : अमर उजाला
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कानपुर में कटे-फटे नोट बदलने के नाम पर काला धन सफेद करने का खेल करने वाले व्यापारी सुधाकर जायसवाल के मामले में आयकर जांच निदेशालय की एक और दरियादिली सामने आई है। जांच निदेशालय के प्रधान निदेशक ने बरामद रकम को सीज करके 25 दिन तक अपने कब्जे में नहीं लिया।

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यह रकम इतने दिन तक पुलिस की कस्टडी में बनी रही। बरामद रकम को बिना सीज किए ही कालाधन होने की जांच करने का दावा किया जाता रहा। अमर उजाला की पड़ताल में खुलासा होने के बाद प्रधान निदेशक अमरेंद्र कुमार को यह याद आया कि पुलिस की सुरक्षा में रखी रकम को वारंट जारी कर अपने कब्जे में लेना चाहिए और सीजर की कार्रवाई करते हुए इसे सरकारी खजाने में जमा कराया जाना चाहिए।

 

जांच निदेशालय से पहले दिन से ही बरती गई लापवाही

12 अप्रैल को पकड़ी गई 96 लाख रुपये की रकम सात मई को खबर छपने के बाद आठ मई को बेहद गोपनीय तरीके से सीज की गई। हैरत की बात तो यह है कि प्रधान निदेशक खुद इस मामले की मॉनीटरिंग कर रहे हैं। अमर उजाला की पड़ताल में सामने आया है कि काला धन बरामदगी के इस मामले में जांच निदेशालय की ओर से पहले दिन से लापरवाही बरती गई।

कैश पकड़े जाने के बाद 20 दिन में सिर्फ इतना तय हो पाया था कि सुधाकर पर काला धन रखने की कार्रवाई हो सकती है। हालांकि इस दिशा में जांच निदेशालय के मुखिया यह नहीं तय कर पाए थे कि क्या किया जाना चाहिए। सूत्रों ने बताया कि बरामद हुई रकम पर टैक्स लगाकर इस मामले को खत्म करने की तैयारी चल रही थी।

इसी बीच अमर उजाला में प्रकरण की पड़ताल करती हुई खबर छपी तो प्रधान निदेशक हरकत में आए, उन्होंने वारंट जारी कर कैश को अपने कब्जे में लिया। बताया जा रहा है कि अब यह कैश आसानी से नहीं छूट सकेगा। 





 

पकड़ी गई लापवाही तो निदेशक ने नहीं की बात

टैक्स मामलों के जानकारों का कहना है कि विभाग को कालाधन होने की आशंका थी तो उसे तत्काल अपने कब्जे में ले लेना चाहिए और सरकारी खाते में जमा करा देना चाहिए। इसके बाद जांच में जिस तरह के तथ्य सामने आते, वैसी कार्रवाई करनी चाहिए।

कैश सीज करने में देरी के मामले में प्रधान निदेशक से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन न तो फोन उठा, न उन्होंने कार्यालय में मुलाकात की। उनका पक्ष आने पर उसे निष्पक्षता के साथ प्रकाशित किया जाएगा। 
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पांच व्यापारियों से पूछ-ताछ के बाद भी आयकर विभाग के हाथ खाली

12 अप्रैल को नयागंज के रामगंज मोहल्ले से कटे फटे नोट बदलने के मामले में व्यापारी से पुलिस ने एक करोड़ 48 लाख रुपये बरामद किए थे। पुलिस ने इसे हवाला की रकम मानते हुए मामला आयकर जांच निदेशालय के सुपुर्द कर दिया था।

आयकर अफसरों ने हवाला की रकम होने का पुलिस का दावा तत्काल खारिज कर दिया था। दो दिन तक आयकर अफसर नोट गिनते रहे। इसमें 96 लाख रुपये की बरामदगी दिखाई। (बाकी रकम गिनती योग्य नहीं थी) पांच कारोबारियों को नोटिस जारी कर इस प्रकरण में लिप्त होने संबंधी सवाल पूछे गए, लेकिन कुछ हासिल नहीं हुआ।

सुधाकर जायसवाल से भी कई दौर की पूछताछ के बाद अफसरों के हाथ कुछ नहीं लगा। कुल मिलाकर अब तक की जांच में आयकर विभाग के हाथ खाली हैं। शुरुआती पूछताछ में सुधारक ने इस खेल में कुछ बैंक वालों की मिलीभगत की बात कबूली थी, लेकिन यह बात भी रफा-दफा हो गई। 
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