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घनघोर जंगल में इस खूंखार डाकू का सामना करना नहीं आसान, कारण जान आप भी होंगे हैरान

Fri, 25 Aug 2017 06:35 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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घने जंगल में बबुली कोल का सामना करना आसान नहीं
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चित्रकूट के मानिकपुर क्षेत्र के जंगलों में डकैतों से मुठभेड़ पुलिस के लिए आसान नहीं है। इसलिए इस इलाके में जब-जब पुलिस ने डाकूओं की घेराबंदी की है उन्हें असफलता ही हाथ लगी है। इन कारणों से यहां के डाकू और अधिक खूंखार व खतरनाक होते जा रहे हैं।   
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ऐसा नहीं है कि पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है। डाकुओं के सफाए की खातिर लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान एक-एक कर अब तक कई डाकुओं को ठिकाने भी लगाया जा चुका है। हाल में डाकू ललीत पटेल का एनकाउंटर बड़ा उदाहरण है। वहीं इससे पहले डाकू गोप्पा को पुलिस ने घेराबंदी कर पकड़ लिया था। दोनों कुख्यात डकैत थे। इन्हें रास्ते से हटाना पुलिस के बाय हाथ का खेल था लेकिन अब जिसका नंबर अब लगा है वो पुलिस को छकाता नजर आ रहा है। 

दरअसल, यह डाकू बेहद शातिर है। इसलिए पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ रहा। गुरुवार को भी दिनभर मुठभेड़ चली लेकिन यह शातिर डकैत अपने गिरोह के साथ बच निकलकर भागने में कामयाब रहा। जानिए कौन है ये शातिर डाकू और कैसे ये पुलिस के शिकंजे से हर बार बच निकल जाता है...
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चित्रकूट के गांवों में दहशत का पर्याय बना ये खूंखार डकैत

चित्रकूट के जंगल
इस डकैत का नाम है 'बबुली कोल', जो इस वक्त चित्रकूट के गांवों में दहशत का पर्याय बना हुआ है। इसके सिर पर सरकार ने पूरे पांच लाख तीस हजार का इनाम धरा है। जो कोई इसे जिंदा या मुर्दा पकड़ लाए तो 50 हजार का इनाम पाए।   इतना बड़ा इनाम सिर पर होने के बावजूद किसी पुलिसवाले की हिम्मत नहीं पड़ती कि इसके इलाके में अकेले दाखिल हो जाए। चलो दाखिल हो भी जाए तो उसे पकड़ने का ख्याल तो दिल में लाना भी उसके लिए खतरे से खाली नहीं होगा। अब तक जिसने भी इस खूंखार डकैत को पकड़ने का सोचा है वो अपने मिशन में कामयाब नहीं रहा है। ये हकीकत है कि केवल एक बार बबुली कोल पुलिस की गिरफ्त में आया था लेकिन तब वह एक छोटे से जुर्म में पकड़ा गया था और न ही तब तक उसका इतना नाम था लेकिन जब वो जेल से छूट कर आया तो वह कुछ साल बाद डाकैतों की दुनिया का बड़ा नाम बन गया। इसलिए इलाके में आज उसकी तूती बोलती है।    यह हकीकत है कि केवल एक बार पुलिस के हत्थे चढ़ने के बाद डकैत बबुली कोल की परछाई तक को पुलिस छू नहीं पाई। वह हवा कि तरह इलाके बदलता रहता है। चित्रकूट के जंगलों से पूरी तरह वाकिफ है। इसलिए उसे पुलिस से मुठभेड़ में बचने के तरीके भी पता है। आइए जानें कि बबुली कोल अब तक पुलिस से बचने के क्या तरीके अपनाता रहा है... 
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ऐसे पुलिस के हाथों से बच निकलता है बबुली कोल

डाकू बबुली कोल से मुठभेड़ की तस्वीर
1. बबुली कोल घनघोर जंगलों का फायदा उठाता है
 इस इलाके के 40 किलोमीटर के दायरे में घनघोर जंगल हैं। मिर्जापुर विंध्य पर्वत की पहाड़िया भी लगी हैं। इसी कारण जंगल डाकुओं के लिए मुफीद स्थान रहा है। एमपी की सीमा लगी होने का भी डाकू फायदा उठाते हैं।    2. वारदात को अंजाम देकर पहाड़ पर चढ़ जाते हैं डकैत  जंगल में बसे अधिकतर गांव पहाड़ों के नीचे बसे हैं। डाकू गांवों में वारदात कर पहाड़ों पर चढ़ जाते हैं। डकैतों की सूचना मिलने पर पुलिस को घनघोर जंगल से होकर गुजरना पड़ता है। गांव पहुंचते ही डाकू जंगल से भागकर पहाड़ों पर चढ़ जाते हैं। 3. यूपी से एमपी के जंगलों में भाग जाता है डकैत मानिकपुर क्षेत्र के जंगल से भरतकूप और एमपी के भी जंगल लगे हैं, जिनका दायरा लगभग 120 किलोमीटर हो जाता है। इस कारण आसानी से डाकू जंगल का सहारा लेकर भाग जाते हैं।   एडीजी बीएन सावंत, डीआईजी ज्ञानेश्वर तिवारी और एसपी प्रताप गोपेंद्र भी कई बार मान चुके हैं कि ऊंचे पहाड़ों और घनघोर जंगल के कारण अक्सर डाकू बच जाते हैं। घेराव के बाद भी पहाड़ के नीचे होने पर पुलिस को लौटना पड़ जाता है।
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