यूपी के जालौन में एक दिव्यांग ने दीवार पर पुलिस के खिलाफ सुसाइड नोट लिख कुएं में कूदकर जान दे दी। परिजन ने कहा कि कुछ लोगों से झगड़े के बाद फरियाद लेकर कोंच कोतवाली गया था। पुलिस ने उल्टा दिव्यांग पर ही मुकदमा दर्ज कर लिया था। घटना से पुलिस महकमे में खलबली मच गई।
जालौन के कोंच में एक विकलांग ने मंदिर की दीवार पर पुलिस के खिलाफ सुसाइड नोट लिखकर कुएं में कूदकर जान दे दी। पुलिस ने गोताखोर की मदद से शव निकलवाकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। घटना से पुलिस महकमे में खलबली मची है।
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सीओ का कहना है कि हर पहलू की बारीकी से जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। दिव्यांग के पुत्र ने भी एक दुकानदार समेत कुछ लोगों व पुलिस पर आरोप लगाए हैं।
कस्बे के प्रताप नगर निवासी दिव्यांग मनोज हिंगवासिया (57) गुरुवार शाम घर से बिना बताए निकल गए थे। देर रात तक न लौटने पर परिजनों ने तलाश की। शुक्रवार सुबह सीसीटीवी फुटेज में वह कैलिया बाईपास स्थित पंचानन चौराहे की ओर जाते दिखाई दिए। वह हाथ में छड़ी और पॉलिथीन में पानी लिए हुए थे।
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बाईपास के पास स्थित शंकर जी के मंदिर के सामने बने कुएं के बाहर उनकी चप्पल, छड़ी, लोअर और पानी की बोतल मिली। परिजनों ने पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस और फायर सर्विस टीम ने गोताखोर को कुएं में उतारा तो शव मिल गया।
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परिजनों का आरोप है कि किसी बात पर विवाद होने पर कुछ लोगों ने दिव्यांग को जूते-चप्पलों से पीटा था। वह फरियाद लेकर कोंच कोतवाली पहुंचा तो पुलिस ने उल्टा उसी पर मुकदमा दर्ज कर दिया । दिव्यांग मनोज के पुत्र प्रखर हिंगवासिया ने बताया कि मुकदमा दर्ज होने के बाद से पिता तनाव में रहने लगे थे। प्रखर का कहना है कि कुछ लोग मामले में समझौते के लिए पैसे की मांग कर रहे थे। इसी मानसिक प्रताड़ना और पुलिस कार्रवाई से आहत होकर उनके पिता ने यह आत्मघाती कदम उठाया है।
मंदिर की दीवार पर मार्कर से लिखा सुसाइड नोट अस्पष्ट
मनोज हिंग्वासिया ने कुएं के सामने स्थित मंदिर की दीवार पर मार्कर से सुसाइड नोट लिखा जो पूरी तरह से पढ़ने में नहीं आ रहा है। काफी गहनता से पढ़ने पर बस इतना समझ में आ रहा है कि मनोज ने पुलिस की कार्यप्रणाली से क्षुब्ध होकर जान दी है। मौके पर पहुंची फॉरेंसिक टीम ने दीवार पर लिखे इस नोट को साक्ष्य के तौर पर संकलित किया है।
सड़क हादसे के बाद मानसिक रूप से परेशान रहते थे मनोज
परिजनों के अनुसार मनोज हिगवासिया कई वर्ष पहले हुए सड़क हादसे के बाद मानसिक रूप से परेशान रहने लगे थे। हादसे में उनकी कमर में गंभीर चोट आई थी जिसके बाद से उनका इलाज भी चल रहा था।
घर के लोगों ने बताया कि हादसे के बाद उनका स्वभाव बदल गया था। छोटी-छोटी बातों पर लोगों से उनका विवाद हो जाता था। इसी कारण कई बार झगड़े की नौबत भी आई। कुछ मामले कोतवाली तक पहुंचे थे।
बात-बात पर विवाद करने वाले दिव्यांग पर दर्ज हैं मामले
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार दिव्यांग मनोज के खिलाफ एक मुकदमा और एक एनसीआर भी दर्ज है। एक मामले में शांतिभंग की कार्रवाई भी की गई थी।
परिजनों का कहना है कि वह लंबे समय से मानसिक तनाव में रह रहे थे और उनका इलाज भी कराया जा रहा था जिसका कोई विशेष लाभ नहीं मिला। छोटी-छोटी बातों पर विवाद खड़ा कर देने की उनकी आदत में सुधार नहीं था।
शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। दीवार पर लिखा गया सुसाइड नोट पूरी तरह से समझ में नहीं आ रहा है। सुसाइड नोट की जांच कराई जा रही है। छह माह के बाद से मृतक के खिलाफ किसी ने कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई है, न ही मनोज ने ही किसी के खिलाफ कोई शिकायत की है। जुलाई 2025 में हुई मारपीट के मामले में आरोप लगाया गया है जिसकी गहराई से जांच कराई जा रही है। -परमेश्वर प्रसाद, सीओ कोंच