केडीए में दो करोड़ रुपये से ज्यादा का डीजल घोटाला हुआ है। अपर जिलाधिकारी (आपूर्ति) बसंत लाल की जांच में घोटाले की पुष्टि हुई है। घोटाले में तत्कालीन केयरटेकर सहित कई अफसरों की मिलीभगत की आशंका है। विस्तृत जांच के बाद इन अफसरों पर गाज गिर सकती है।
केडीए केयरटेकर विभाग ने सवा साल पहले तक उस समय भी कागजों पर जेनरेटर चलता दिखाकर डीजल की रकम डकारी, जिस समय बिजली आ रही थी। केडीए कर्मचारी संघ के अध्यक्ष बचाऊ सिंह ने डीजल के नाम पर 2.15 करोड़ रुपये के भुगतान में अनियमितता बरतने का आरोप लगाते हुए 11 महीने पहले तत्कालीन कमिश्नर और डीएम से शिकायत की थी।
डीएम ने इसकी जांच के लिए अपर जिलाधिकारी (आपूर्ति) बसंत लाल की अध्यक्षता में दो सदस्यीय जांच कमेटी गठित की थी। कमेटी में केडीए के अपर सचिव डॉ. गुडाकेश शर्मा भी शामिल हैं। 11 महीने चली इस जांच के बाद एडीएम (आपूर्ति) ने कमिश्नर डॉ. राजशेखर को गोपनीय रिपोर्ट सौंपी।
एक अधिकारी के अनुसार शुरुआती जांच में घोटाले की पुष्टि हुई है। केयरटेकर के साथ इस विभाग के प्रभारी सहित कौन - कौन अधिकारी शामिल हैं, इसका पता विस्तृत जांच में पता चलेगा। उधर, केडीए के एक अधिकारी ने बताया कि यह मामला उजागर होने के बाद विकास प्राधिकरण में डीजल खर्च कम हो गया है।