योगी जी यहां तो कुछ नहीं बदला... हालात वैसे के वैसे हैं। गुरुवार को आप कानपुर पधारे तो सब सही कर दिया गया लेकिन जब आप वापस लौटे तो फिर सब वही का वही...
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शनिवार से उर्सला में एंटी रैबीज इंजेक्शन लगना बंद हो गए। रविवार को ढाई सौ से अधिक मरीजों को बैरंग घर लौटना पड़ा।
इधर अस्पताल प्रशासन ने भी जून में इंजेक्शन उपलब्ध कराने से हाथ खड़े कर दिए हैं। कुत्ते के काटने से पीड़ित 250 - 300 मरीज रोज एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने अस्पताल आते हैं।
अस्पताल प्रशासन ने गुरुवार को मुख्यमंत्री के दौरे की संभावना पर ओपीडी में एंटी रैबीज इंजेक्शन के 20 वॉयल उपलब्ध कराए थे। इससे दो दिन में 80 मरीजों को इंजेक्शन लगाए गए। दस जून से फिर इंजेक्शन लगना बंद हो गए।
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ऐसा लग रहा है मानो मजाक चल रहा हो। मुख्यमंत्री जी आने वाले हैं ये खबर सुनी तो सारी व्यवस्था दुरुस्त और जब लौट जाएं तो फिर से वहीं सब। आम जनता के साथ ये कैसी चालबाजी चल रही है।
अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संजीव कुमार ने इस संबंध में बताया कि नियमानुसार एक महीने में कोई भी एक दवा एक लाख रुपये से ज्यादा की नहीं खरीदी जा सकती है।
एंटी रैबीज इंजेक्शन के लिए धनराशि खत्म हो चुकी है। यदि ठेकेदार ने आपूर्ति नहीं की तो इस महीने अस्पताल में एंटी रैबीज इंजेक्शन नहीं लग पाएंगे।