चित्रकूट शासन प्रशासन अस्पतालों में बेहतर इलाज का दावा करते हैं। लेकिन उड़ीसा के भुवनेश्वर में हुई आग लगने जैसी किसी भी घटना से बचने के लिए यहां पर कोई उपकरण नहीं है। जबकि अस्पतालों में बीड़ी सिगरेट व अन्य ज्वलनशील चीजों का इस्तेमाल बिना रोक टोक के किया जा रहा है। बिजली के उपकरण लगाने में भी लापरवाही की जाती है।
यूपी के कई अस्पतालों में आग लगने की कई छोटी मोटी घटनाएं हो चुकी हैं। यहां पर इससे बचने का कोई स्थाई सामाधान नही किया गया। जिला चिकित्सालय में भी आग बुझाने के उपकरण नहीं हैं। 100 शैया वाले इस अस्पताल में प्रतिदिन 50 मरीज तो भर्ती ही रहते हैं। हैरत की बात यह है कि सीएमओ से लेकर अग्शिमन अधिकारी भी मानते हैं कि यदि आग लगने जैसी कोई अप्रत्याशित घटना हुई तो बचाव के कोई ठोस उपाय नहीं हैं। पूरे अस्पताल में कोई अगिभन बुझाने वाली गैस किट नहीं है। बालू व पर्याप्त पानी का इंतजाम नहीं है।
मरीज के तमीरदार अस्पताल परिसर में छोटे गैस सिलेंडरों में खाना बनाते है। इसके साथ स्टोप में भी खाना बनाया जाता है। वहीं खुद अस्पताल में कार्य करने वाले कुछ डाक्टर व कर्मचारी सिगरेट का इस्तेमाल करते है। जिससे लापरवाही करने से कभी भी आग लग सकती है।