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यूपी के नए DGP की मां का दर्द, 'बेटा घर आ जाओ, एक साल से नहीं देखा'

Tue, 25 Apr 2017 05:29 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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डीजीपी सुलखान सिंह
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यूपी के नये डीजीपी सुलखान सिंह की मां का एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। इस वीडियो में डीजीपी की मां सादगी भरे शब्दों में अपने बेटे से अपील करती हुई देखी जा रही हैं।
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सुलखान सिंह यूपी में बांदा जिले के जौहरपुर गांव के रहने वाले हैं। गांव के घर पर भले ही आज आईपीएस सुलखान लिखा हो लेकिन ये घर बेहद साधारण सा दिखता है। डीजीपी सुलखान की मां अरुणा उर्फ करुइया देवी आज भी इसी गांव में रहती है और ग्रामीण परिवेश में ही अपना जीवन- यापन कर रही हैं। देखकर कोई भी यह अंदाजा नहीं लगा सकता कि ये ही यूपी के डीजीपी सुलखान की मां हैं। डीजीपी की मां बताती हैं कि सुलखान के चार भाई हैं और उनमे से सुलखान डीजीपी बन गया है। जैसे ही यह खबर गांव पहुंची कि गांव के लाल को डीजीपी जैसी अहम जिम्मेदारी दी गई है गांव में खुशियां मनाई जाने लगी। इसी बीच डीजीपी की मां का मार्मिक अपील करता एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया जिसमें डीजीपी की मां कह रही हैं कि- बेटे घर आ जाओ, मैंने तुम्हें पूरे एक साल से नहीं देखा। 
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डीजीपी सुलखान के एक बेटा और दो बेटियां हैं

डीजीपी सुलखान सिंह की मां
सुलखान के सबसे छोटे भाई रजनीश गांव में रहकर खेती का काम देखते हैं। डीजीपी सुलखान के एक बेटा व दो बेटियां हैं। गांव वाले बताते हैं कि जब भी वह गांव आते थे तो उनकी सादगी देखती ही बनती थी। सुबह की दिनचर्या योगा से शुरू होती। मां ने बताया कि बेटे से कहा है कि जल्द ही वह गांव आ जाए। जिस राज्य की पुलिस को देश की भ्रष्ट पुलिस में सबसे पहले गिना जाता रहा है वहां आज इसी मां का लाल सुलखान सिंह डीजीपी की कु्र्सी पर बैठाया गया है। वो सुलखान सिंह जिनकी ईमानदारी को पूरे आईपीएस कैडर में बेजोड़ कहा गया हैं। जिस प्रदेश में थाने और चौकी नीलाम होते हों। जिस प्रदेश में नोएडा, गाजियाबाद या कानपुर जैसे जिलों के कप्तान सरकार की काली कमाई के पूत हों वहां आज तीन कमरे की सम्पति वाला एक ईमानदार बड़ा पुलिस अधिकारी बना है।
 
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भोग विलास की जगह सुलखान सिंह को सादगी पसंद

सुलखान सिंह
सादगी के लिए पहचाने जाने वाले सुलखान जिन्हें बैचमेट योगी कहकर बुलाते हैं वो अक्सर  भोजन में  चना और लई खाते हैं। उन्नाव में जब मुलायम में उन्हें ईमानदारी की सजा देते हुए तीन दिन के लिए ट्रेनिंग कॉलेज का प्रिंसिपल नियुक्त किया तो उनके पास दो कमरे थे, जिसमे डीजी सुलखान रहते थे। उनकी ईमानदारी की वजह से भ्रष्ट दीवान, दरोगा, थानेदार और कप्तान हिले हुए थे। 1980 बैच के आईपीएस रहे सुलखान ने भी साफ़ कह दिया था कि दरोगा हो या डीआईजी आप ईमानदारी से काम करोगे तो हर मुसीबत में मैं आपके साथ खड़ा हूँ लेकिन अगर एक पैसे की भी शिकायत मिली तो किसी भी कीमत पर छोडूंगा नहीं। 
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