अहं ब्रह्मास्मि (मैं ब्रह्मा हूं)। दुनिया में प्रत्येक व्यक्ति का अपना ब्रह्मांड होता है। वह इसी ब्रह्मांड के अनुसार सोचता और क्रियाएं करता है। उपनिषद का यह वाक्य आज के दौर में भी प्रासंगिक है। व्यवसाय में सफलता के लिए विक्रेताओं को ग्राहक के ब्रह्मांड का ध्यान रखना होगा। उसके अनुरूप सोचने और उसकी जरूरतों के मुताबिक व्यवसाय करने वाले ही सफल होंगे। यह बातें लेखक, पुराणशास्त्री देवदत्त पटनायक ने कहीं। पटनायक रविवार को कानपुर के रागेंद्र स्वरूप आडिटोरियम में कानपुर फिक्की फ्लो की ओर से आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने भारतीय पौराणिक परंपराओं को आधुनिक दौर में भी तरक्की का आधार बताया।
पटनायक ने कहा कि यज्ञ को कुछ लोगों ने त्याग-बलि के रूप में परिभाषित किया है, जबकि इसका उद्देश्य कुछ पाना भी होता है। बस भावनाएं पवित्र रखनी होती है। व्यवसाय भी एक यज्ञ ही है। इसमें निवेशक इस उम्मीद में निवेश करते हैं कि उन्हें इससे रिटर्न मिलेगा। फिक्की फ्लो की लखनऊ-कानपुर की चेयरपर्सन अर्चना खेतान ने बताया कि महिलाओं को चूल्हे से निजात दिलाने के संस्था बायोमॉस के स्टोव उपलब्ध कराएगी।
50 महिलाओं को यह चूल्हे, सोलर लाइट प्रदान करने के लिए इस फंड रेजर (धन एकत्रित करना) कार्यक्रम को आयोजित किया गया है। इवेंट हेड आरती गुप्ता ने बताया कि अक्तूबर में यह चूल्हे और लाइटें सिस्टम समेत महिलाओं को दी जाएंगी। श्रमिक भारती इस किट को घरों में इंस्टाल करने में सहयोग करेगी। मुफ्त में मिली चीजों की बेकद्री होती है, इसलिए 1700 रुपये लेकर यह किट महिलाओं को दी जाएगी। इसकी वास्तविक कीमत करीब दस हजार रुपये होगी।