कानपुर देहात। गर्मी शुरू होने से पहले पूर्व तैयारी धरी रह गई और चार माह में 677 ट्रांसफार्मर दगा दे गए। हर दिन पांच से अधिक ट्रांसफार्मर फुंकने का औसत रहा। नगर व ग्रामीण क्षेत्र में समय पर ट्रांसफार्मर नहीं बदल सके। कई-कई दिन बिजली गुल रहने से उपकरण ठप रहे और पेयजल किल्लत हुई।
जनपद में 47 उपकेंद्र और करीब 2.75 लाख से अधिक बिजली कनेक्शन हैं। बिजली निगम गर्मी में निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए मार्च में सुधार (अनुरक्षण) कार्य कराता है। इस बार भी तैयारी में सब ठीक होने का दावा किया गया लेकिन धरातल पर स्थिति अलग रही। अनुरक्षण के दौरान ट्रांसफार्मरों की जांच में ढिलाई और खामियां दुरुस्त न किए जाने से बिजली की मांग बढ़ी तो ट्रांसफार्मर दगा देना शुरू हो गए। हालात ये हुए कि हर दिन पांच से अधिक ट्रांसफार्मर फुंकने का औसत रहा। वर्कशॉप में ट्रांसफार्मर मरम्मत करने वाले मिस्त्री पसीना फेंक गए।
फुंके ट्रांसफार्मरों को ठीक करने में समय लगा। इससे तय समय में प्रभावित क्षेत्र की बिजली आपूर्ति बहाल नहीं की जा सकी। कुछ क्षेत्रों में तीन दिन तो कुछ जगह पर सात दिन बाद बिजली आपूर्ति बहाल की जा सकी। कई जगह बिजली आपूर्ति बहाल करने में इससे भी अधिक समय लगा। आंकड़ों पर गौर करें तो अप्रैल में 132 ट्रांसफार्मर फुंक गए। इसमें सबसे अधिक 68 ट्रांसफार्मर 25 केवी के फुंके। मई में 149 ट्रांसफार्मर फुंके। इसमें 25 केवी के 82 ट्रांसफार्मर फुंके। जून में 207 ट्रांसफार्मर दगा दे गए। इसमें 25 केवी के 118 ट्रांसफार्मर शामिल हैं। जुलाई में 189 ट्रांसफार्मर फुंक गए। इसमें 25 केवी के 111 ट्रांसफार्मर फुंके। कुल फुंके ट्रांसफार्मर में सबसे अधिक 25 केवी के 379 ट्रांसफार्मर शामिल हैं।
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बयान....
ट्रांसफार्मर फुंकने पर ठीक करने में समय लगता है। छोटी खराबी तो कुछ घंटे में ठीक कर लिया जाता है लेकिन कई बार जली कॉइल बदलनी पड़ती है। इसके बाद ओवन में करीब 18 घंटे ट्रांसफार्मर को सुखाया जाता है। मेगर जांच आदि के बाद ट्रांसफार्मर साइट पर भेजा जाता है। गर्मी में तेजी से ट्रांसफार्मर फुंकने से कार्यशाला पर काम का बोझ बढ़ने से ट्रांसफार्मर बदलने में समय लगता है। हालांकि समय से ट्रांसफार्मर बदलवाने का हर संभव प्रयास किया जाता है। - कुसुम चंद्रा, एसडीओ कार्यशाला जैनपुर।
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गर्मी और सर्दी से पहले अनुरक्षण कार्य कराया जाता है। ट्रांसफार्मर फुंकने की कई वजहें हैं। कई बार बिजली गिरने या फिर लाइन फॉल्ट और ओवरलोड की स्थिति भी ट्रांसफार्मर फुंकते हैं। ट्रांसफार्मर कम से कम फुंकें यह प्राथमिकता में है। इसके लिए 15 सितंबर में डेढ़ माह का अनुरक्षण कार्यक्रम शुरू किया जाएगा। 25 केवी व 63 केवी ट्रांसफार्मर की मरम्मत में करीब दस हजार रुपये और 250 से लेकर 400 केवी ट्रांसफार्मर की मरम्मत में करीब 50 हजार रुपये खर्च का औसत है। इसके लिए यूपीपीसीएल की तरफ से बजट की व्यवस्था की जाती है। - मनीष कुमार गुप्ता, अधीक्षण अभियंता
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पुखरायां खंड में सबसे ज्यादा फुंके ट्रांसफार्मर
कानपुर देहात। पुखरायां खंड में बीते चार माह में सबसे अधिक ट्रांसफार्मर फुंके हैं। कुल 271 ट्रांसफार्मर फुंके जबकि 25 केवी के 160 ट्रांसफार्मर फुंक गए। दूसरे स्थान पर रनियां खंड रहा। कुल 238 ट्रांसफार्मर फुंके। इसमें 25 केवी के 110 ट्रांसफार्मर फुंके। जबकि झींझक खंड में सबसे कम ट्रांसफार्मर फुंके। कुल 168 ट्रांसफार्मर फुंके। इसमें 25 केवी के 109 ट्रांसफार्मर फुंक गए। (संवाद)
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साइट सर्वे में खेल से बनी स्थिति, खर्च हुए 44 लाख से ज्यादा
हर दिन पांच से अधिक ट्रांसफार्मर फुंकने के पीछे की वजह जानकार साइट सर्वे में खेल बताते हैं। जानकारों का कहना है कि उपकेंद्र पर तैनात जेई या अन्य बिजली कर्मी ट्रांसफार्मर की मौके पर जांच करने नहीं जाते हैं। इसकी वजह से ट्रांसफार्मर में पावर ऑयल में आई कमी समय रहते पूरी नहीं की जाती है। ट्रांसफार्मर के इर्द-गिर्द झाड़ियां उग जाती हैं। इसकी वजह से फॉल्ट होते हैं। वहीं ट्रांसफार्मर का अर्थ व फ्यूज वायर का अर्थ सही न होना भी ट्रांसफार्मर फुंकने की बड़ी वजह है। इसके साथ ही ट्रांसफार्मर में फेज-वार लोड बैलेंसिंग न होने से भी ट्रांसफार्मर दगा दे जाते हैं। कई बार फ्यूज वायर के बजाय अन्य तारों से फ्यूज बांधने से भी ट्रांसफार्मर फुंकते हैं। जानकारों का कहना है कि छोटी-बड़ी खामी मिलाकर 677 ट्रांसफार्मर ठीक करने में करीब 44 लाख से अधिक खर्च का अनुमान है।