कानपुर। साहेब स्मृति फाउंडेशन की ओर से शनिवार को परेड स्थित आईएमए सभागार में राष्ट्रीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का आयोजन किया गया। शायर अलका मिश्रा ने ख्वाहिशें, ख्वाब, बुलंदी है फकत सांसों तक, साथ ले जाते नहीं कुछ भी तो जाने वाले...’ सुनाया तो पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा। यहां मुंबई, गोरखपुर, भोपाल, नगीना, उज्जैन, मेरठ, प्रतापगढ़ समेत कई शहरों के कवियों और शायरों ने देर रात तक अपनी रचनाओं से श्रोताओं को बांधे रखा।
कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि आईएमए अध्यक्ष डॉ. अनुराग मेहरोत्रा और डॉ. ईरा मिश्रा ने दीप जलाकर की। डॉ. ईशा त्रिपाठी ने सभी का स्वागत किया। गजल गायक प्रदीप श्रीवास्तव ने सूफी संत हजरत मंजूर आलम शाह साहेब की रूहानी रचनाओं का गायन किया। अध्यक्षता लखनऊ के प्रोफेसर डॉ. नैय्यर जलालपुरी ने की।
नाज प्रतापगढ़ी ने अपनी रचना मुस्कुरा कर तूने ली कुछ ऐसी अंगड़ाई..., पं. महेंद्र मधुर ने कहां किसको कभी गुजरी कहानी याद रहती है..., मनीष शुक्ला ने हैं खुद मर्ज में गिरफ्तार हम पे हंसते हैं..., डॉ. नुसरत मेहंदी ने हम दीवाने हैं कि रुसवाई लिए बैठे हैं... सुनाया।
अतीक फतेहपुरी ने निकलना अंधेरों से दुश्वार होता..., अतहर शकील ने फिर तेरी याद मुझे रात दिलाने आया... सुनाकर मंत्रमुग्ध किया। लोकेश शुक्ल ने तुम कभी उस द्वार पर जाकर तो देखो, प्राण के बंधन तुम्हें छूटे मिलेंगे से भावविभोर किया। डॉ. नुसरत अतीक गोरखपुरी ने तुझ जैसी वफादारी तो होगी नहीं मुझसे..., हसरत सैफीपुरी ने दौर ऐसा है कोई सुनता नहीं... , कलीम कैसर ने वो एक पल भी नहीं जाता ध्यान से बाहर... सुनाया। इस दौरान प्रस्तुतियों पर लगातार तालियां बजती रहीं। मौके पर संरक्षक फारूक जायसी, मनीष तिवारी, डॉ. आदित्य पांडेय आदि मौजूद रहे।