कानपुर। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को अपना मास्टर मानकर निर्भर हो गए तो यह हानिकारक होगा। इसे अपने सहायक के तौर पर इस्तेमाल किया तो काम आसान होगा और तरक्की के नए रास्ते खुलेंगे। यह बातें शुक्रवार को कानपुर प्रेस क्लब में एआई के युग में पत्रकारिता की चुनौतियां विषय पर आयोजित गोष्ठी में सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विभोर सचान ने कहीं।
उन्होंने कहा कि एआई एकत्र डाटा और ऑब्जर्वेशन पर काम करता है। यह तकनीक मस्तिष्क पढ़कर निष्कर्ष दे सकती है लेकिन इसमें संवेदना, जज्बात, भावना, मानवता और दयालुता नहीं होगी। प्रो. अनोखेलाल पाठक ने कहा एआई की मदद से तथ्य तलाश सकते हैं लेकिन समय, परिस्थिति और प्रस्तुतीकरण पत्रकार को ही करना होगा। वरिष्ठ पत्रकार डॉ. रमेश वर्मा ने कहा कि पत्रकारिता में एआई से खबरों में इनपुट बेहतर हो सकता है लेकिन उस पर पूरी तरह निर्भर हुए तो फिर नुकसान की भरपाई होना मुश्किल है। इस दौरान डॉ. अभिषेक त्रिवेदी, अध्यक्ष सरस वाजपेयी, महामंत्री शैलेश अवस्थी, सुनील साहू, मोहित दुबे, श्याम तिवारी आदि मौजूद रहे।