शहर की दो फर्मों ने कुछ समय के भीतर चार करोड़ रुपये के बिल और टैक्स इनवॉइस बेच डाली। साथ ही 24 लाख रुपये का फर्जी आईटीसी क्लेम भी करा लिया। इस फर्जीवाड़े का खुलासा गोपनीय सूचना पर की गई जांच में हुआ है। विभागीय पड़ताल में फर्मों के कार्यस्थल से संबंधित खंड अफसरों की मिलीभगत की भी खबर है। इस मामले में आला अधिकारियों ने एफआईआर कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही दोनों के टिन निरस्त कर दिए गए हैं।
बर्रा-2 स्थित केडीए मार्केट अग्रवाल ट्रेडर्स और बर्रा विश्व बैंक कॉलोनी की फर्म पीके इंटरप्राइजेज के टैक्स चोरी में लिप्त होने की खबर वाणिज्य कर विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा को बीते दिनों मिली। यह भी पता चला कि दोनों फर्में अपने दिए गए पते पर कार्यरत नहीं। इस पर एसआईबी की एक टीम ने मौके पर जाकर सत्यापन किया तो बात सही निकली। फर्मों से संबंधित कागजातों की पड़ताल हुई तो पता चला कि ये फर्में खंड-4 में पंजीकृत अग्रवाल ट्रेडर्स नवंबर-14 में पंजीकृत हुई थी, जबकि पीके इंटरप्राइजेज चार साल से चल रही है। इस अवधि में दोनों ने करीब चार करोड़ रुपये से ज्यादा के बिल और टैक्स इनवॉइस जारी किए, जबकि असल में कोई खरीद-फरोख्त हुई ही नहीं। सारा खेल कागज पर होता था, जिससे विभाग को करोड़ों का झटका लगा है। यही नहीं बिल और इनवॉइस के जरिए 24 लाख रुपए का इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) क्लेम भी किया गया। सूत्रों के मुताबिक ये फर्में आशीष कुमार अग्रवाल नाम के शख्स की बताई जाती हैं। एसआईबी ने एडिशनल कमिश्नर (ग्रेड-2) केशव लाल को फर्जीवाड़े की पूरी रिपोर्ट बनाकर दी है। उन्होंने संबंधित ज्वाइंट कमिश्नर (कार्यपालक) को पत्र लिखकर संबंधित फर्म और प्रोपराइटर के खिलाफ एफआईआर कराने की संस्तुति की है। सूत्रों के मुताबिक खंड-4 के अफसर इस मामले में दोषी माने जा रहे हैं, क्योंकि दोनों फर्में उन्हीं के खंड में पंजीकृत थीं। कार्यस्थल व आईटीसी का सत्यापन उन्हीं के स्तर से किया जाना चाहिए, जिसमें भारी लापरवाही बरती गई है।
------------------------------
छह बाई छह के कमरे में चल रही फर्म
बीती 28 मई को वाणिज्य कर विभाग द्वारा पकड़ी गई सुपाड़ी को दो गाड़ियों में बड़ी कहानी सामने आई है। दोनों ही गाड़ियों को रोककर कागजात मांगे गए तो ड्राइवर या फर्म मालिक कोई कागज या बिल नहीं दिखा सके। 55 लाख रुपये के इस माल को विभाग ने जब्त कर लिया। फर्म संचालक जीतेंद्र चौरसिया द्वारा दिए गए कार्यस्थल के पते पर 30 मई को एसआईबी की एक टीम जांच करने गई तो पता चला कि यहां कामतगिरि ट्रांसपोर्ट कंपनी के दफ्तर में एक छोटे से कमरे में फर्म का कार्यस्थल दिखाया गया है। अधिकारियों को यहां किसी प्रकार की व्यापारिक गतिविधि संबंधी प्रमाण नहीं मिले। इस पर एडिशनल कमिश्नर (ग्रेड-2) वीपी सिंह ने खंड 22 को पत्र लिखकर गहराई से छानबीन करने के निर्देश दिए।
------------------------------
करमुक्ति का ब्यौरा न भेजने पर फटकार
स्टॉक ट्रांसफर के नाम पर करमुक्ति लेने संबंधी फॉर्म (ई-1सी) का दुरुपयोग करके टैक्स चोरी के मुद्दे पर कमिश्नर ने शुक्रवार को कुछ अधिकारियों को फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि एक सप्ताह पूरा होने के बाद भी सूचनाएं क्यों नहीं भेजी गईं। कमिश्नर ने हर हाल में शनिवार तक सूचनाएं मुख्यालय भेजने के लिए कहा है। सूत्रों के मुताबिक करीब पांच खंड ऐसे हैं, जहां करमुक्ति के नाम पर जमकर फर्जीवाड़ा हुआ है। यदि इसकी गहराई से जांच हुई तो असिस्टेंट कमिश्नर से लेकर ज्वाइंट कमिश्नर तक का फंसना तय है। इसलिए वे सूचनाएं देने में आनाकानी कर रहे हैं। हालांकि इस मुद्दे पर कमिश्नर का रुख सख्त है।
-------------------------------
जिम्मेदारों की बात -:
खंड के अधिकारियों को गहराई से सभी फर्मों की पड़ताल के लिए कहा गया है। प्रारंभिक जांच में ये फर्में फर्जी साबित हुई हैं। इनके विरुद्ध एफआईआर की संस्तुति भी की गई है। साथ ही मुख्यालय को भी पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया गया है।
केशव लाल, एडिशनल कमिश्नर (ग्रेड-2)
दोनों फर्मों का सत्यापन सीटीओ के स्तर से किया गया था। पीके इंटरप्राइजेज चार साल से चल रही थी, जो अपना सालाना टर्नओवर आठ-दस लाख दर्शाती थी, जबकि अग्रवाल ट्रेडर्स ने आठ महीने में ही एक करोड़ से अधिक का टर्नओवर होना दिखाया है। विभागीय नियमों के हिसाब से यह दोनों फर्में मेरे कार्यक्षेत्र से बाहर की हैं। फिलहाल दोनों का टिन निरस्त कर दिया है।
एसपी सिंह, असिस्टेंट कमिश्नर (खंड-4)