नोटबंदी की चोट आम आदमी के साथ किन्नरों पर भी पड़ी है। शादी-समारोह में नेग मांगने पहुंचने वाले किन्नरों को हजारों रुपये की मुंहमांगी रकम मिलना तो दूर, दो-चार सौ रुपये भी नहीं मिल रहे हैं।
कस्बा के किन्नर मुन्नी और कल्लू ने बताया कि किसी विवाह समारोह में उनको कम से 2100 रुपये से लेकर 11 हजार रुपये तक का नेग मिल जाता था। कहा करमजली नोटबंदी ने उनके पेट पर लात मार दी है।
कुछ ऐसा ही हाल शादी-बारातों में काम करने वाले नाई, माली, कहार, कुुम्हार, सफाई कर्मी और वेटर आदि को मिलने वाले पुरस्कार और टिप नोटबंदी के चलते सीमित हो गए हैं। वहीं, बारात की निकासी, अगवानी, जयमाल और विदाई के समय हवा में कड़क नोट उड़ाने वाले भी मायूस हैं। पर्स में दस-बीस, पचास और 100 रुपये के पुराने सड़े-गले नोटों को सहेज कर रखते दिखाई पड़ रहे हैं।