चाहे सुप्रीम कोर्ट फटकारे या एनजीटी, गंगा पर जिला प्रशासन और सभी विभागों के अफसरों की आंखें बंद हैं। आश्वासन समिति ने गुरुवार को अफसरों के साथ जाजमऊ का निरीक्षण किया तो ‘अंधेर नगरी चौपट राजा’ वाली कहावत ताजा हो गई।
गंगा किनारे अवैध ग्लू फैक्ट्रियां खुलेआम धधक रही थीं और उनसे निकलने वाला जहरीला कचरा गंगा में बहाया जा रहा था। सब जानते हैं कि ये अवैध ग्लू फैक्ट्रियां ‘बड़े-बड़ों की कमाई’ का दशकों पुराना साधन हैं। अफसरों के पूछने पर उ.प्र. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी टीयू खान सिर झुकाए खड़े रहे।
रोक के बावजूद वाजिदपुर में गंगा किनारे निर्माण कार्य चल रहे थे। ऐसी ही अनदेखी के कारण दो दिन पहले नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने गंगा सफाई के लिए फंडिंग पर रोक लगा दी थी।
धड़ल्ले से हो रहे हैं अवैध निर्माण
चेयरमैन ने वाजिदपुर में गंगा किनारे धड़ल्ले से अवैध निर्माण होते देख नाराजगी जताई। कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने गंगा से 200 मीटर तक निर्माण पर रोक लगाई है, फिर भी यहां बड़े - बड़े प्लाट, खेतों तक की जमीन पर अवैध निर्माण हो रहे हैं। डीएम ने इस अवैध टेनरियों पर कहा कि आखिर यह निर्माण किस आधार पर हो रहे हैं।
ग्लू फैक्ट्रियां कैसे चल रहीं?
विधानसभा की आश्वासन समिति के चेयरमैन सतीश महाना, सदस्य मनीष अतीजा, डीएम कौशलराज शर्मा सहित विभिन्न विभागों के अफसरों के साथ साढ़े ग्यारह बजे वाजिदपुर नाले पर पहुंचे। गंगा किनारे अवैध रूप से 25 से ज्यादा ग्लू फैक्ट्रियां चल रही थीं। बदबूदार जहरीला धुंआ निकल रहा था और कचरा गंगा में जा रहा था।
यह देख डीएम हतप्रभ रह गए। उ.प्र. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी टीयू खान से इस बाबत पूछा गया तो वह स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए। उन्होंने क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी टीयू खान से कहा कि अभी दो महीने पहले ग्लू भट्ठियां हटाई गई थीं, फिर कैसे चल रही हैं?। आप लोग करते क्या हैं? चेयरमैन महाना ने क्षेत्रीय अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई के लिए प्रमुख सचिव (पर्यावरण) को लिखने के निर्देश डीएम को दिए।
ये है ग्लू फैक्ट्री
ग्लू फैक्ट्री में चमड़े की छीलन को तेजाब डालकर सड़ाया जाता है, फिर इससे बनने वाली चर्बी घी-तेल फैक्ट्रियों को सप्लाई की जाती है। कचरा गंगा में डाल दिया जाता है।
ये है आश्वासन समिति
विधानसभा में विधायकों की तरफ से उठाई जाने वाली जिन समस्याओं को पूरा करने का सरकार आश्वासन देती है, उन्हें पूरा कराने के लिए यह समिति मॉनीटरिंग करती है। विस में लोकलेखा समिति के बाद इसे दूसरी सबसे बड़ी समिति माना जाता है। इसे मिनी विधानसभा भी कहा जाता है