जब से जीएसटी लागू हुआ है। हर तरफ व्यापारियों का बंदी का एलान सुनार्ई दे रहा है, पर इस बार जीएसटी की मार श्मशान घाट की लकड़ियों तक अा पहुंची है। जीएसटी लागू होने के बाद भी मंडी में आंधी सी मची हुई है। इस बार श्मशान घाट लकड़ी व्यापारियों ने बंदी का एलान कर दिया है। शुल्क और ट्रांजिट शुल्क वसूले जाने का विरोध कर रहे टिंबर उद्योग व्यापार मंडल ने सोमवार को अमानवीय फैसला किया।
व्यापार मंडल ने घोषणा की है कि 26 जुलाई को होने वाली प्रदेश व्यापी बंदी में श्मशान घाट के लकड़ी व्यापारी भी शामिल रहेंगे। व्यापार मंडल ने अपने लेटर पैड में इस बात का दावा किया कि भैरोघाट के प्रबंध गुरु सुरेश कुमार और भगवतदास घाट के राजुल चौधरी ने बंदी वाले दिन श्मशान घाट में लकड़ी न बेचने की सहमति दे दी है।
26 को बंदी के समर्थन में लकड़ी व्यापारियों ने कोपरगंज में प्रदर्शन भी किया। टिंबर उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश महामंत्री ने कहा कि सरकार एक राष्ट्र एक कर की अवधारणा पूरी नहीं कर पा रही। प्रदेश में लकड़ी पर मंडी और ट्रांजिट शुल्क मिलाकर 7.5 फीसदी अतिरिक्त टैक्स देना पड़ रहा है। सरकार से मांग की गई थी कि अतिरिक्त शुल्क समाप्त किए जाएं, लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया गया। इस कारण व्यापारी लकड़ी बाजार बंद रखने के साथ ही श्मशान घाट में भी लकड़ी की सप्लाई ठप रखेंगे। फिलहाल दो घाटों के प्रमुखों की रजामंदी मिल गई है।
उधर, जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह ने कहा कि शव का अंतिम संस्कार आवश्यक सेवाओं में शामिल है। लकड़ी कारोबारियों से बातचीत कर इसका हल निकाला जाएगा। यदि नहीं माने तो प्रशासन श्मशान घाटों में लकड़ी की व्यवस्था कराएगा। लकड़ी न होने की वजह से किसी का अंतिम संस्कार नहीं रुकेगा।