बच्चों के यौन उत्पीड़न का आरोपी निलंबित जेई रामभवन रिमांड पर सीबीआई के हाथ लगेगा या जेल की बैरक में ही रहेगा? यह फैसला बुधवार (25 नवंबर) को होगा। मंगलवार को सीबीआई और आरोपी पक्ष के अधिवक्ताओं की लगभग एक घंटे की दलीलें सुनने के बाद विशेष न्यायाधीश (पास्को एक्ट) मोहम्मद रिजवान अहमद ने फैसला सुरक्षित कर लिया।
बुधवार को इसे सुनाया जाएगा। सीबीआई ने 16 नवंबर को गिरफ्तार आरोपी रामभवन को यहां प्रथम अपर सीजेएम नदीम अनवर की कोर्ट में पेश करने के बाद एक दिन के लिए रिमांड पर लिया था। इसके बाद उसे जेल भेज दिया था।
उसे दोबारा पांच दिन की कस्टडी रिमांड पर लेने के लिए अदालत में फिर अर्जी दाखिल की गई थी। इस पर अदालत ने 18 को संक्षिप्त सुनवाई के बाद अगले ही दिन 19 नवंबर तिथि निर्धारित कर दी। 20 को भी संक्षिप्त सुनवाई के बाद 24 नवंबर तय कर दी थी।
मंगलवार को सुबह से ही विशेष न्यायाधीश (पोक्सो एक्ट) की अदालत में सीबीआई और आरोपी के अधिवक्ता पहुंच गए। अदालत परिसर और मुख्य प्रवेश गेट में बड़ी तादाद में पुलिस तैनात कर दी गई। दोपहर करीब 12 बजे रिमांड अर्जी पर सुनवाई शुरू हुई।
सीबीआई के अधिवक्ता अशोक कुमार सिंह और स्थानीय विशेष अभियोजक रामसुफल सिंह व मनोज दीक्षित तथा जय प्रकाश साहू ने अदालत में अपनी दलीलें पेश कीं। कहा कि आरोपी से मिले साक्ष्यों की तस्दीक और पूछताछ आदि के लिए रिमांड पर लिया जाना न्याय हित में आवश्यक है।
जेई के शिकार कुछ बालकों के पते आदि शिनाख्त कराना हैं। उधर, आरोपी के अधिवक्ता अनुराग पटेल व देवदत्त तिवारी ने रिमांड अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि सीबीआई कई दिनों तक आरोपी को अपने साथ लिए रही है।
पूछताछ और साक्ष्य इकट्ठा कर चुकी है। इलेक्ट्रानिक उपकरण बरामद कर चुकी है। अब रिमांड कस्टडी का कोई औचित्य नहीं रह जाता। बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने कहा कि आरोपी को अब रिमांड पर लेकर शारीरिक व मानसिक पीड़ा पहुंचाना उद्देश्य है।
सुनवाई के दौरान सीबीआई के डिप्टी एसपी अमित कुमार व उनके विभागीय सहयोगी अदालत में उपस्थित रहे। दोनों पक्षों की लगभग एक घंटे तक चली सुनवाई के बाद न्यायाधीश श्री रिजवान ने अपना फैसला सुरक्षित कर लिया। इसे वह अगले दिन (बुधवार) को सुनाएंगे।
कोरोना निगेटिव होने पर ही प्रभावी होगा रिमांड आदेश
कोरोना संक्रमण फिलहाल आरोपी निलंबित जूनियर इंजीनियर रामभवन को कुछ दिन के लिए रिमांड कस्टडी पर सीबीआई के हाथ आने से बचा सकता है। उसके निगेटिव (स्वस्थ) होने पर ही सीबीआई उसे अपने कब्जे में ले सकेगी।
यह बात इस मामले के विशेष लोक अभियोजक (पॉस्को) रामसुफल सिंह और एडीजीसी मनोज दीक्षित व जयप्रकाश साहू ने बातचीत के दौरान मीडिया से कही। उन्होंने कहा कि यदि कस्टडी रिमांड स्वीकृत होता है तो आरोपी के स्वस्थ होने तक यह आदेश निलंबित रहेगा। उसके स्वस्थ होने पर ही रिमांड मिलेगा।