बांदा में चार माह पूर्व पिता के इलाज के लिए ग्रामीणों और रिश्तेदारों से लिए गए छह लाख रुपये कर्ज की अदायगी न कर पाने और लगातार तगादे से बेहाल दो बीघा जमीन के काश्तकार युवक ने बुधवार को जहर खाकर खुदकुशी कर ली। पहले पति की मौत, फिर इकलौते बेटे के जान देने से परिवार में दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
तिंदवारी थाने के बेंदा गांव निवासी दशरथ यादव की चार माह पूर्व छत से गिरने से रीढ़ की हड्डी टूट गई थी। इकलौते बेटे संजय यादव (20) ने पिता के इलाज के लिए ग्रामीणों और रिश्तेदारों से करीब छह लाख रुपये का कर्ज लिया था। कानपुर के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान करीब साढ़े तीन माह पूर्व दशरथ की मौत हो गई।
इसके बाद रिश्तेदारों और ग्रामीणों ने कर्ज की अदायगी के लिए तगादा शुरू कर दिया। बुधवार की दोपहर गांव से दो किमी दूर जंगल में संजय ने जहर खा लिया। जंगल में अचेत पड़े संजय को परिजन तिंदवारी पीएचसी लाए। वहां से शाम सात बजे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।
देर रात संजय ने दम तोड़ दिया। चचेरे भाई कमल ने बताया कि कर्ज की अदायगी न होने से संजय परेशान रहता था। एक बहन की शादी तीन साल पहले हो चुकी है। छोटी बहन की शादी अभी नहीं हुई है। संजय की मां सुमन भी मानसिक रूप से कमजोर है।