महोबा के पनवाड़ी क्षेत्र के महोबकंठ गांव के किसान निर्मल रावत (40) ने मऊरानीपुर, झांसी स्थित ससुराल में जाकर जहर खा लिया। हालत बिगड़ने पर परिजन उसे महोबा जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। आरोप है अस्पताल में डॉक्टर मौजूद नहीं मिले। डॉक्टर ने फोन भी रिसीव नहीं किया। इसके चलते निर्मल की इलाज के अभाव में मौत हो गई। परिजनों ने मुताबिक निर्मल ने कई महाजनों से कर्ज ले रखा था, जिसे वह चुका नहीं पा रहा था। इसे लेकर परेशान था।
निर्मल महोबकंठ गांव निवासी ब्रजभूषण का बेटा था। उसके पास चार बीघा खेती थी। खेती से वह पत्नी रानू और दो बच्चों के साथ ही माता-पिता का भरण-पोषण सही तरीके से नहीं पा रहा था। परिवार के लिए रोटी और बच्चों की पढ़ाई के लिए उसने गांव के महाजनों से एक लाख से अधिक का कर्ज लिया था। अब वह कर्ज नहीं चुका पा रहा था। पत्नी रानू ने बताया कि पति आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे। महाजन भी पति उस पर पैसा लौटाने का दबाव बना रहे थे। इससे पति काफी परेशान था।
रानू के मुताबिक बुधवार को पति मऊरानीपुर, झांसी के केलुआ गांव अपनी ससुराल गए थे। वहां पति ने जहर खा लिया। हालत बिगड़ने पर निर्मल को पनवाड़ी सीएचसी लाया गया। यहां से डॉक्टर ने उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया। किसान नेता संतोष तिवारी ने बताया कि निर्मल को जिला अस्पताल ले जाने वालों में वह भी शामिल थे। उनका आरोप है कि अस्पताल में डॉक्टर ड्यूटी पर मौजूद नहीं थे। डॉक्टर ने उनका फोन भी रिसीव नहीं किया। उनका कहना है कि अगर समय पर निर्मल को इलाज मिल जाता, तो उसकी जान बच सकती थी। निर्मल की मौत से उसकी पत्नी और बच्चों का रो-रो कर बुरा हाल रहा। ग्रामीण उन लोगों को समझा कर शांत कराने में लगे रहे।