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चिड़ियाघर में छज्जू की हार्टअटैक से मौत

Tue, 21 Apr 2015 02:20 AM IST
अमर उजाला कानपुर
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चिड़ियाघर में छज्जू की हार्टअटैक से मौत
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29 साल छह माह उम्र थी, चिंपांजी की अमूमन उम्र होती है 27 से 30 साल
बीते साल 22 अक्तूबर को जू कर्मियों ने बच्चों संग सेलिब्रेट किया था छज्जू का बर्थडे
अमर उजाला ब्यूरो
कानपुर। कानपुर प्राणि उद्यान के आकर्षण का केंद्र रहे चिंपांजी ‘छज्जू’ की हार्टअटैक से मौत हो गई। वह 29 साल छह महीने का था। छज्जू की मौत से जू अधिकारी से लेकर कर्मचारियों में शोक व्याप्त है। डॉ. यूसी श्रीवास्तव और डॉ. मोहम्मद नासिर की टीम ने छज्जू का पोस्टमार्टम किया। उन्होंने पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह हार्टअटैक बताई है।
अपने करतबों से पूरे जू का चहेता बना छज्जू दो दिन से बीमार था। सुबह डॉक्टर और निदेशक उसका चेकअप करने गए थे। निदेशक मुकेश कुमार ने बताया कि छज्जू पूरी तरह ठीक था। सुबह उसने थोड़ा खाना भी खाया था। दोपहर करीब ढाई बजे कीपर से छज्जू के अचेत होने की सूचना मिली तो डॉक्टरों की टीम मौके पर पहुंची। तब तक छज्जू दम तोड़ चुका था। उसका उम्रदराज होना और हार्टअटैक पड़ना उसकी मौत की वजह बनी। डॉक्टरों ने बताया कि आमतौर पर चिंपाजी की उम्र 27 से 30 साल होती है। इस लिहाज से छज्जू उम्र के अंतिम पड़ाव पर था। निदेशक मुकेश कुमार ने बताया कि छज्जू का जन्म 22 अक्तूबर 1985 को जू में ही हुआ था। छज्जू की मां जुमा और पिता पाश्चा को हॉलैंड के ज्यूरिक शहर से यहां लाया गया था। यहां इन्होंने छज्जू और शनि को जन्म दिया। शनि को बाद में लखनऊ भेज दिया गया। 22 अक्तूबर 2014 को जू में छज्जू का 29वां जन्मदिन जू कर्मियों ने बच्चों संग बड़ी धूमधाम से सेलिब्रेट किया था। इसके बाद 19 फरवरी 2015 को छज्जू पेड़ से गिर गया था।
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पहले भी पड़ चुका है हार्टअटैक
छज्जू को करीब पांच साल पहले भी अटैक पड़ा था। करीब 15 दिन डॉक्टरों की निगरानी में रहने के बाद वह स्वस्थ हुआ था।
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पसंद थे केले, सेब
छज्जू को केले और सेब बेहद पसंद थे। कीपर शिव नारायण ने बताया कि छज्जू को जितने भी मौसमी फल दिए जाते थे, उनमें सबसे पहले वह केले और सेब को खाता था।
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नहीं दिखेंगे छज्जू के करतब
दर्शकों को देखते ही और कीपर का एक इशारा पाते ही छज्जू खूब गुलाटियां खाता था, ताली बजाता और कई बार तेजी से सीटी बजाकर अपनी खुशी का एहसास करवाता था। कीपर के केले फेंकने पर वह उसे कैच करता था। बाड़े में बने सीमेंट के शेड के ऊपर चढ़कर धूप सेंकने से लेकर रस्सी पकड़कर उछलकूद करना छज्जू को खूब भाता था।
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नहीं पसंद था गार्ड उदयभान
मस्तमौला छज्जू को गार्ड उदयभान फूटी आंख नहीं सुहाता था। उदयभान को देखते ही छज्जू धीरे से बाड़े में पड़े पत्थर को उठाता और उसकी ओर फेंकता था। इससे कई बार उदयभान घायल भी हुए थे। इसके अलावा छज्जू को जब गुस्सा आता तो पूरे बाड़े का चक्कर लगाने लगता था। जू के पुराने कीपर बताते हैं कि छज्जू की मां जुमा तो एक बार बाड़ा तोड़कर टाइगर के बाड़े में पहुंच गई थी। टाइगर को जोरदार थप्पड़ रसीदने के बाद पेड़ पर चढ़ गई थी, जिसे बड़ी मुश्किल से बाड़े के भीतर किया गया था।
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ऐसे होते हैं चिंपांजी
चिंपांजी की गिनती सबसे बुद्धिमान जानवर में होती है। यह अफ्रीका के जंगलों में पाया जाता है। अगर इन्हें रोज शीशे के सामने खड़ा किया जाए तो ये अपना अक्स पहचान लेंगे, जबकि बाकी जानवर इसे दूसरा जानवर समझेंगे।
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चिंपांजी के 98 फीसदी लक्षण इंसानों से मिलते हैं, इनकी पूंछ भी नहीं होती है। चिंपांजी को अगर सिखाया जाए तो ये इंसानों की तरह छूरी और चम्मच से खा सकते हैं।
चिंपाजी वैसे तो शाकाहारी होते हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर ये बंदरों का शिकार करके खा सकते हैं। मनुष्य की तरह ये भी अपनी खुशी और दुख जताते हैं।
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