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राज्यपाल राम नाईक बोले, ‘मैं भी था कैंसर से पीड़ित’

Fri, 06 Oct 2017 04:55 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक
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1994 में उन्हें भी कैंसर हुआ था। तब वह महाराष्ट्र से सांसद थे। बेटी ने हौसला बढ़ाया और उन्होंने कैंसर को मात दे दी। आज वो 84 साल के हैं और बिल्कुल स्वस्थ हैं। हम बात कर रहे हैं यूपी के राज्यपाल राम नाईक की। 
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राज्यपाल राम नाईक ने गुरुवार को छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू-कानपुर) में ‘फाइट अगेंस्ट कैंसर’ विषय पर आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने अपने अनुभव भी साझा किए।  राज्यपाल ने बताया कि एक दिन उनके सांसद साथियों ने गिरता स्वास्थ्य और आंखें पीली देखकर जांच करवाने की सलाह दी। वह तुरंत संसद भवन के मेडिकल सेंटर में चले गए। वहां जांच में तो कुछ नहीं निकला लेकिन डॉक्टर ने एडवांस टेस्ट कराने को कहा। तब उन्हें कैंसर के बारे में पता चला।
  राज्यपाल ने बताया कि डॉक्टर ने उनसे विदेश में भी इलाज की सारी व्यवस्था हो जाने की बात कही। हालांकि उन्होंने मुंबई स्थित टाटा कैंसर रिसर्च सेंटर में ही इलाज करवाने पर सहमति जताई। उनकी बेटी खुद कैंसर पर रिसर्च कर रही थी, उसे डॉक्टरों ने पूरी रिपोर्ट भेजी। रिपोर्ट देख बेटी ने हौसला बढ़ाया। कहा आप आठ से नौ माह में सही हो जाएंगे। टाटा में पूरा इलाज हुआ और नौ माह में वे ठीक हो गए। राज्यपाल ने आमजन को कैंसर के प्रति जागरूक रहने के लिए कहा। बोले, कैंसर भयावह जरूर है लेकिन सही जानकारी और समय पर इलाज से इसे मात दे सकते हैं। समारोह के शुभारंभ समारोह में कुलपति प्रो. जेवी वैशंपायन, कांफ्रेंस के संयोजक और विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. अशोक कुमार, आईएमए कानपुर के अध्यक्ष डॉ. प्रवीण कटियार, डॉ. हेमंत प्रतीक सहित देश और दुनिया के कई बड़े चिकित्सक मौजूद रहे।  
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योग करें, दुरुस्त रहें
राज्यपाल ने कहा कि योग हर बीमारी को आपसे दूर करता है। वह बचपन से ही योग करते थे। इसलिए उन्होंने कैंसर को आसानी से मात दे दी। योग मजबूत बनाता है। शारीरिक और मानसिक दोनों ही तौर पर।

प्रदेश में सीएसजेएमयू आगे
राज्यपाल ने विश्वविद्यालय परिसर में बने यूआईईटी-4 बिल्डिंग और लीगल एंड क्लिनिक का शुभारंभ भी किया। इस दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय और कुलपति की तारीफ भी की। बोले, प्रदेश के बाकी विश्वविद्यालयों से तुलना की जाए तो कानपुर विश्वविद्यालय की रैंक अच्छी है। उन्होंने कहा कि सभी शिक्षण संस्थानों को अपनी स्थिति का आकलन खुद करना चाहिए।
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ये भी बोले राज्यपाल
- चिकित्सकों को दुनिया भर में हो रहे नए शोध की जानकारी रखनी चाहिए।
- चिकित्सक कोशिश करें कि कैंसर पीड़ितों को आर्थिक मदद की जानकारी भी दें। कहां, कहां से उन्हें मदद मिल सकती है, ये बताएं।
- कैंसर के इलाज में इच्छाशक्ति की भूमिका अहम है। आपको खुद जीने की इच्छा रखनी होगी।
- आयुर्वेद के तौर-तरीके भी बेहद अच्छे हैं। उसे बढ़ावा मिलना चाहिए।
- कैंसर के खिलाफ जंग में सबको एकजुट होना होगा लेकिन इसकी अगुवाई सेनानी के तौर पर चिकित्सकों को ही करनी है।
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