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पितर ही नहीं, आप भी तरते हैं श्राद्ध से

Wed, 06 Sep 2017 11:34 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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पितृ पक्ष 6 से 20 सितंबर तक चलेगा। प्रतिपदा का श्राद्ध बुधवार की दोपहर 12 बजे के बाद से किया जाएगा। चतुर्दशी एवं अमावस्या का श्राद्ध 19 सितंबर को किया जाएगा। जबकि 20 सितंबर को स्नान, दान एवं पितृ विसर्जन गंगा घाटों में किया जाएगा।  
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इन दिनों घर में प्याज, लहसुन, मांस-मंदिरा, पान, तेल मालिश, गंदगी और शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं। उधर, गंगा घाटों में पितृ पक्ष को लेकर पुरोहितों ने तैयारी शुरू की। जानकारों की मानें तो श्राद्ध कर्म से संतुष्ट पूर्वज अपने वंशजों को खुशहाली का आशीर्वाद देते हैं।   पंडित केए दुबे पदमेश का कहना है कि कर्मकांड मार्ग प्रदीप में मनुष्यों के लिए देव ऋण, ऋषि ऋण व पितृ ऋण यानी तीन ऋण बताए गए हैं। मनुष्य को चाहिए कि जिन देवताओं ने हम पर कृपा करके मनुष्य जीवन दिया है उनके ऋण को उनकी भक्ति, उपासना करके उतारने का प्रयत्न करें। जो ऋषि विश्व कल्याण की कामना से जंगलों में निवास करते हैं और यथा संभव उनकी मदद-आदर करें।
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इसी प्रकार जब हमें जन्म देने वाले माता-पिता जो अनेक कष्ट उठाकर हमें पालते हैं उनकी अधिकाधिक सेवा करनी चाहिए। शास्त्रों में मरणोपरंत उनका श्राद्ध कर ऋण उतारना आवश्यक बताया गया है। इस बार 6 सितंबर को दोपहर 12:30 बजे के बाद से प्रतिपदा का श्राद्ध किया जाएगा।

14 सितंबर को मातृ नवमी का श्राद्ध होगा। प्रतिदिन कुत्ते, गाय और कौओं को भोजन जरूर खिलाएं। श्राद्ध का अर्थ श्राद्ध का अर्थ श्रद्धा पूवर्क किए गए कार्य से है। खुश होते हैं तो आशीर्वाद देते हैं पूर्वज चिंतक इंस्टीट्यूट आफ वैदिक साइंसेज के सचिव शशि शेखर त्रिपाठी ने बताया कि सामान्य शब्दाें में जब आप अपने पितरों को सम्मान देते हैं। उनकी याद में ब्राह्मण, गाय, श्वान, कौवे आदि को भोजन खिलाता है।

पात्र व्यक्ति को दान करता है, पूजन करता है तो पूर्वज प्रसन्न होते हैं। खुश होकर वह अपने वंशज को आशीर्वाद देते हैं। इसे उसे जीवन में सांसारिक और आध्यात्मिक खुशी मिलती है।

 

इसका रखें विशेष ध्यान

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- पितृ पक्ष में जौ, गेहूं, धान, तिल, मूंग, चना, गाय, भूमि, घी, गुड़, वस्त्र, नमक, सोना या चांदी का दान महादान माना गया है।
- महिलाएं जल अर्पण, श्राद्ध या पंडित को भोजन देते समय बाल खुले न रखें।
- जो पुरुष अपने पितरों को जल अर्पण कर श्राद्ध, पिंडदान या पंडित को भोजन दें वे पान मसाला, तंबाकू, शराब, मांस से दूर रहें।
- परिवार में जिन पूर्वजों की मृत्यु का दिन, तारीख या तिथि पता न हो, उनकी और अकाल मृत्यु प्राप्त करने वाले पूर्वजों का श्राद्ध कर्म अमावस्या और पूर्णिमा के दिन कर सकते हैं।
- जल अर्पण के साथ भोजन में काले तिल का उपयोग अवश्य करें। पंडित को साफ आसन पर मौन होकर भोजन परोसें। मेज-कुर्सी का उपयोग न करें।
 

विशेष तिथियां

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6 सितंबर को- प्रतिपदा का श्राद्ध
14 सितंबर को-मातृ नवमी (माता की मृृत्यु की तिथि ज्ञात न होने पर श्राद्ध का विधान)
19 सितंबर को-पितृ अमावस्या (मृतक की तिथि ज्ञात न हो)

 

बिना खर्च के भी हो सकता है श्राद्ध

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आचार्य डॉ.आदित्य पांडेय ने बताया ब्रह्मपुराण का कथन है कि मनुष्य के पास यदि श्राद्ध करने को कुछ भी न हो तो केवल शाक से ही श्रद्धा पूर्वक श्राद्ध कर सकता है। विष्णु पुराण के अनुसार श्रद्धालु को भी सभी वस्तुओं के अभाव में वन में जाकर अपनी दोनों भुजाओं को उठाकर कह देना चाहिए कि मेरे पास श्राद्ध के योग्य न धन है और न दूसरी वस्तु। अत: मैं अपने पितरों को ह्दृय से प्रणाम करता हूं वे मेरी भक्ति से ही तृप्ति लाभ करें।

 
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महिलाएं भी कर सकती हैं श्राद्ध

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जिनके घर में पुत्र, नाती या पोता नहीं है, या फिर घर में ऐसी परिस्थिति है कि पुत्र और नाती-पोते साथ नहीं हैं, उन घरों में महिलाएं भी अपने ससुराल व मायके पक्ष के पितरों का श्राद्ध कर्म कर सकती हैं।
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