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ओडीओपी में शामिल दूध से बने उत्पाद, बढ़ेगा रोजगार

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कानपुर देहात/रनियां। ओडीओपी (एक जिला एक उत्पाद) में अभी तक स्टेंसिल व प्लास्टिक से बने उत्पाद शामिल थे। अब प्रसंस्करण कर दूध से बने उत्पादों पनीर, घी व खोया आदि को भी शामिल किया गया है। जिले में लगभग दो लाख दूध उत्पादक हैं और बड़े स्तर पर दूध का उत्पादन होता है। ओडीओपी में शामिल होने पर यहां इकाईयों की स्थापना होगी। अन्य निजी कंपनियों से प्रतिस्पर्धा का सीधा फायदा दूध उत्पादकों को होगा। कामगारों को रोजगार मिलेगा।
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आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत कृषि उपजों एवं उत्पादों को व्यवसायिक रूप देने के उद्देश्य से खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय ने जिले के लिए दूध से बने उत्पादों को शामिल किया है। अभी तक जिले में पशुपालक के लिए दूध डेयरी या फिर घरेलू बाजार उपलब्ध है। जबकि कानपुर में भी बड़ी मात्रा में दूध की बिक्री होती है।
ओडीओपी में दूध से बने उत्पादों को शामिल करने से जिले में सरकार की मदद से इन उत्पादों को बनाने की इकाई की स्थापना का रास्ता खुल गया है। इकाई स्थापना से जिले में दूध उत्पादकों के लिए बाजार में विस्तार होगा। निजी क्षेत्र की पूर्व से स्थापित डेयरी से प्रतिस्पर्धा का सीधा फायदा दूध उत्पादकों को मिलेगा। इससे रोजगार सृजन होगा और कामगारों को फायदा मिलेगा।
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दुग्ध उत्पादों की एक प्रसंस्करण इकाई से 70 से 80 कामगारों को रोजगार मिलेगा। वहीं, दूध उत्पादकों को स्पर्धा की वजह से सही मूल्य मिलेगा। पशुपालकों के लिए केंद्र सरकार की यह योजना कल्याणकारी है।
- चंद्रभान सिंह, उपायुक्त, जिला उद्योग केंद्र
ओडीओपी में और उद्योग लगाने का स्कोप है। इसके इच्छुक पीएमएफएमई (प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना) में ऑनलाइन पंजीकरण करा सकते हैं। इसमें बंद पड़ी इकाई को पुनर्जीवित भी करा सकते हैं या फिर पूर्व से चल रही इकाई में अलग यूनिट लगा सकते हैं। जिले का लक्ष्य आने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- सुभाष चंद्र, जिला उद्यान अधिकारी
क्या है ओडीओपी योजना
इकाई की लागत का लगभग 35 फीसदी या अधिकतम दस लाख रुपये का अनुदान सरकार देगी। इसके साथ ही इन इकाइयों में कामगारों को प्रशिक्षण, क्षमता विस्तार, गुणवत्ता सुधार, ब्रांडिंग, परियोजना रिपोर्ट आदि के लिए वित्तीय एवं तकनीकी सहायता भी सरकार की तरफ से उपलब्ध कराई जाती है। योजना में लाभार्थी की आयु 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए। एक परिवार का एक व्यक्ति ही योजना का लाभ ले सकता है।
जिले में संचालित हैं 17 कामधेनु डेयरी
जिले में सौ गायों वाली एक कामधेनु, 50 गायों वाली पांच मिनी कामधेनु व 25 गायों वाली 11 माइक्रो कामधेनु डेयरी संचालित हैं। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डीएन लवानिया ने बताया कि इन सभी कामधेनू डेयरी में प्रति दिन 6250 लीटर दूध का उत्पादन होता है। दूध से बने उत्पादों को ओडीओपी योजना में शामिल करने से पशुपालकों व डेयरी संचालकों को सीधा फायदा होगा।
बोले पशुपालक
मालवर गांव निवासी पशुपालक गोरे लाल कहते हैं कि दूध उत्पादन के हिसाब से जिले में बाजार उपलब्ध नहीं है। इसकी वजह से कानपुर में दूध बेचने के लिए भेजना पड़ता है। ओडीओपी में इकाई लगने से बाजार उपलब्ध होगा तो दूध का सही मूल्य मिलेगा। वहीं कानपुर की भागदौड़ बचेगी।
कटका गांव निवासी पशुपालक ओमजी द्विवेदी ने बताया कि ओडीओपी योजना में दूध उत्पादों के शामिल होने का फायदा होगा। प्रतिस्पर्धा से दूध का सही मूल्य मिलेगा तो आय में वृद्धि होगी।
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