फक्कड़ डकैत और कुसुमा नाइन की पुरानी फोटो
कानपुर कल्याणपुर से अगवा रिटायर्ड उपनिदेशक का कत्ल करने वाले डकैत फक्कड़ बाबा और कुसुमा नाइन को मंगलवार को आजीवन कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई गई। दोनों ने 50 लाख की फिरौती न मिलने पर उसका कत्ल किया था। यह फैसला 22 साल की लंबी सुनवाई के बाद आया है।
कल्याणपुर निवासी पवन कुमार आदर्श के पिता हरदेव कृषि भवन नई दिल्ली से उपनिदेशक के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। पवन के मुताबिक 4 जनवरी 1995 को उनके घर पर प्रभा कटियार आई थी। वह उनको शादी समारोह में ले जाने के लिए कार से ले गई थी। जब रात को हरदेव घर नहीं पहुंचे तो परिजनों ने उनकी तलाश की, लेकिन कुछ पता नहीं चला। इस बीच उनको डकैत राम आसरे उर्फ फक्कड़ बाबा और कुसुमा नाइन का पत्र मिला। जिसमें उन्होंने लिखा था कि हरदेव का अपहरण कर लिया गया है। अगर हरदेव को देखना है तो बीहड़ आ जाओ। पवन ने बीहड़ जाकर पिता से मुलाकात की। डकैत फक्कड़ बाबा ने उससे कहा कि मैंने 25 लाख में तुम्हारे पिता की पकड़ (बदमाशों से अगवा युवक को खरीदना) ली है। अब अगर पिता को जिंदा देखना चाहते हो तो 50 लाख की फिरौती का इंतजाम कर लो। पवन तय समय पर फिरौती का इंतजाम नहीं कर पाया तो फक्कड़ बाबा और कुसुमा नाइन ने हरदेव की गोली मारकर हत्या कर दी। उन लोगों ने हरदेव को तीन गोलियां मारी थी। इसके बाद उन लोगों ने शव को इटावा के सहसो गांव के पास सड़क फेंक दिया था। इस मुकदमे की सुनवाई एफटीसी (फास्ट ट्रैक कोर्ट) 52 जज अफसा की कोर्ट में हुई। शासकीय अधिवक्ता सरला सिंह ने बताया कि दोनों को आजीवन कारावास और 35-35 हजार रुपये की सजा सुनाई गई है।
बेटे ने डकैतों को पहचान कर गवाही दी
डकैत कुसुमा नाइन और फक्कड़ डकैत की पुरानी फोटो
शासकीय अधिवक्ता और उनके जूनियर कैलाश सैनी ने बताया कि इसमें पवन चश्मदीद गवाह है। उसने डकैत फक्कड़ बाबा और कुसुमा नाइन को कोर्ट में पहचान कर कहा कि इन्हीं दोनों ने उसे बीहड़ बुलाया था। इसके अलावा छह और गवाहों ने दोनों के खिलाफ गवाही दी।
सपा नेत्री सहित सात आरोपी बरी हो चुकी है
कुसुमा नाइन की पुरानी फोटो
शासकीय अधिवक्ता सरला सिंह के मुताबिक फक्कड़ बाबा और कुसुमा नाइन के साथ ही मोहन, देवेंद्र, अरविंद गुर्जर, निर्मला गंगवार, जोहरी सिंह, रमाकांत दुबे और अशोक चौबे भी आरोपी थे। इसमें निर्मला सपा नेता है। वह महिला प्रकोष्ठ की जिलाध्यक्ष रह चुकी है। इन सातों आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर किया जा चुका है। समय से पेश न होने से फैसले में देरी हुई।
शासकीय अधिवक्ता के मुताबिक इस मुकदमे में नौ आरोपी थे। फक्कड़ बाबा और कुसुमा की गिरफ्तारी न होने से उनकी फाइल अलग कर दी गई थी। उनकी गिरफ्तारी के बाद मुकदमे में सुनवाई हुई। फक्कड़ बाबा और कुसुमा के खिलाफ कई मुकदमे चल रहे हैं। इसमें दूसरे जिलों के मुकदमे भी हैं। दोनों दूसरे मुकदमों की तारीख पर चले जाने से इस मुकदमे की सुनवाई में पेश नहीं हो पाते थे। इस वजह से मुकदमे के ट्रायल में देरी हुई।
बेहद खतरनाक है दोनों डकैत
फक्कड़ बाबा और कुसुमा नाइन बेहद खतरनाक डकैत थे। इनका बीहड़ के साथ आसपास के जिलों में आतंक था। इन दोनों डकैतों पर 30 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं। इसमें ज्यादातर मामले अपहरण और फिरौती न मिलने पर कत्ल करने के मामले हैं। दोनों पकड़ खरीदकर फिरौती वसूलते थे।