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सीएसजेएमयू : हर तीसरे जेन-जी में चिंता व पांचवें में अवसाद के संकेत

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कानपुर। मोबाइल स्क्रीन पर लगातार दुनिया से जुड़े रहने वाली जेन-जी के भीतर मानसिक दबाव की तस्वीर भी सामने आ रही है। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के जेन-जी मानसिक स्वास्थ्य सर्वे के प्रारंभिक चरण में 30 फीसदी विद्यार्थियों में चिंता और 19 फीसदी में अवसाद के संकेत मिले हैं।
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विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि ये आंकड़े किसी मानसिक बीमारी का निदान नहीं हैं, बल्कि समय रहते जांच, संवाद और सहायता की जरूरत के संकेत हैं। मनोविज्ञान विभाग के प्रारंभिक सर्वे में 101 विद्यार्थियों को शामिल किया गया। अध्ययन में चिंता और अवसाद के साथ मानसिक खुशहाली, तनाव से निपटने की क्षमता, भावनात्मक जुड़ाव और माता-पिता के साथ संबंधों को भी समझने का प्रयास किया गया। सर्वे में विद्यार्थियों का औसत चिंता स्तर 10.1 रहा, जो सीमा रेखा वाली श्रेणी में आता है। वहीं अवसाद का औसत अंक 7.7 रहा।



करीब आधी जेन-जी की मानसिक खुशहाली कमजोर

मानसिक खुशहाली के आकलन में करीब 47 फीसदी विद्यार्थी निम्न या बहुत निम्न श्रेणी में रहे, जबकि 53 फीसदी विद्यार्थियों में यह अच्छी या उच्च श्रेणी में दर्ज की गई। विशेषज्ञों के अनुसार कम मानसिक खुशहाली को सीधे मानसिक बीमारी नहीं माना जा सकता। यह मनोदशा, ऊर्जा, सकारात्मक अनुभव और जीवन के प्रति संतुष्टि जैसे पहलुओं पर ध्यान देने की जरूरत का संकेत हो सकता है।
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मां से जुड़ाव सहज, पिता के साथ दूरी का पैटर्न

सर्वे में विद्यार्थियों के माता-पिता के साथ भावनात्मक जुड़ाव का भी आकलन किया गया। शुरुआती निष्कर्षों में मां के साथ सुरक्षित और मिश्रित जुड़ाव अधिक दिखाई दिया, जबकि पिता के साथ दूरी बनाने वाला पैटर्न अपेक्षाकृत अधिक रहा। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि इसका अर्थ पिता से खराब संबंध होना नहीं है। पालन-पोषण की शैली, संवाद और पारिवारिक माहौल समेत कई कारक इस जुड़ाव को प्रभावित कर सकते हैं।



अब पांच से सात हजार विद्यार्थियों तक पहुंचेगा सर्वे

कुलपति प्रो. विनय पाठक के अनुसार आज की जेन-जी की मानसिक स्वास्थ्य जरूरतों को समझना विश्वविद्यालय की प्राथमिकताओं में होना चाहिए। प्रारंभिक चरण के बाद सर्वे का दायरा बढ़ाकर पांच से सात हजार विद्यार्थियों तक करने की तैयारी है। इसके लिए 10 टीमें काम कर रही हैं। विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल यह जानना नहीं है कि कितने विद्यार्थी मानसिक दबाव में हैं, बल्कि यह समझना भी है कि जेन-जी तनाव से कैसे निपटती है, उसे भावनात्मक सहारा कहां से मिलता है और किस तरह की मदद उसके लिए उपयोगी हो सकती है। सर्वे के निष्कर्षों के आधार पर विद्यार्थियों के लिए परामर्श, जागरूकता और समय रहते सहायता से जुड़े कार्यक्रम तैयार किए जा सकेंगे।
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