151 स्नातक विद्यार्थियों को शामिल किया
अध्ययन में विभिन्न महाविद्यालयों में अध्ययनरत बीटेक एवं बीसीए पाठ्यक्रमों के 151 स्नातक विद्यार्थियों को शामिल किया गया। अध्ययन के लिए परपजिव सैंपलिंग एवं रैंडम सैंपलिंग तकनीक का उपयोग किया गया। साथ ही केएस मिश्रा स्प्रिच्युअल इंटेलिजेंस स्केल, एंजाइटी स्केल का प्रयोग किया गया।
स्प्रिच्युअल इंटेलिजेंस का स्तर अधिक था
आंकड़ों का विश्लेषण एसपीएसएस सॉफ्टवेयर एवं पियर्सन कोरिलेशन तकनीक से किया गया। अध्ययन में पाया गया कि जिन विद्यार्थियों में स्प्रिच्युअल इंटेलिजेंस का स्तर अधिक था, उनमें एंजाइटी का स्तर अपेक्षाकृत कम पाया गया। जिन छात्रों में आध्यात्मिक जागरूकता, आत्मबोध, मूल्य आधारित सोच एवं भावनात्मक संतुलन अधिक था।
विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए पर्याप्त नहीं
उनमें चिंता एवं मानसिक तनाव का स्तर कम पाया गया। अध्ययन में यह भी बताया गया कि सिर्फ शैक्षणिक उपलब्धियां विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए पर्याप्त नहीं हैं। शिक्षा व्यवस्था में इमोशनल वेल बीइंग, मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता तथा आध्यात्मिक विकास को समान महत्व दिए जाने की आवश्यकता है।
शैक्षणिक दबाव, भविष्य की चिंता तनाव के अहम कारण
अध्ययन में विद्यार्थियों में एंजाइटी के प्रमुख कारणों में शैक्षणिक दबाव के साथ भविष्य की चिंता, सामाजिक प्रतिस्पर्धा, पारिवारिक अपेक्षाएं मिली हैं। डिजिटल जीवनशैली भी एक कारण मिला है। रिपोर्ट में बताया गया है कि विश्वविद्यालयों एवं शिक्षण संस्थानों में आध्यात्मिकता आधारित कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
स्प्रिच्युअल इंटेलिजेंस महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक आयाम
साथ ही, काउंसलिंग सर्विस, योग और ध्यान के अभ्यास आदि भी सुनिश्चित होने चाहिए। शोध के अगुवा डॉ. सिंह ने कहा कि स्प्रिच्युअल इंटेलिजेंस केवल धार्मिक अवधारणा नहीं बल्कि यह व्यक्ति के आत्मबोध, जीवन मूल्यों, सकारात्मक सोच और भावनात्मक संतुलन से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक आयाम है।