छत्रपति शाहूजी महाराज यूनिवर्सिटी ने परास्नातक (एमए, एमएससी, एमकॉम) कक्षा में न पढ़ाने वाले 200 से ज्यादा डिग्री टीचर्स को पीएचडी सुपरवाइजर पद से हटा दिया है।
कानपुर विश्वविद्यालय टीचर्स एसोसिएशन (कूटा) के वरिष्ठ पदाधिकारी और अर्मापुर पीजी कॉलेज के सीनियर टीचर डॉ. एमपी सिंह की भी सुपरवाइजरी चली गई है।
अर्मापुर कॉलेज में एमए अर्थशास्त्र की रेग्युलर पढ़ाई नहीं होती है, फिर भी वह पिछले सात साल से अर्थशास्त्र के पीएचडी सुपरवाइजर थे।
यूजीसी के मुताबिक सुपरवाइजर के लिए सेल्फ फाइनेंस कोर्स में पढ़ाने का अनुभव मान्य नहीं होता है। सुपरवाइजरों की छुट्टी के बाद पीएचडी की सीटें भी कम हो सकती हैं।
यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) की नई नियमावली को ध्यान में रखकर ही कानपुर यूनिवर्सिटी ने पीएचडी आर्डिनेंस 2014 संशोधित कर दिया है।
तय किया है कि अब अनुदानित कॉलेज के रेग्युलर परास्नातक कोर्स में पढ़ाने और 5 साल का अनुभव रखने वाले टीचर्स ही पीएचडी सुपरवाइजर बन सकेंगे।
इस व्यवस्था के लागू होने के बाद ही रेग्युलर कोर्स के स्नातक (बीए, बीएससी, बीकॉम) कक्षा में पढ़ाने वाले डीबीएस पीजी कॉलेज के डॉ. सुशील कुमार उपाध्याय सहित 200 से ज्यादा टीचर्स को सुपरवाइजर पद से हटा दिया गया है।
वीएसएसडी के डॉ. विवेक पांडेय, महिला महाविद्यालय की डॉ. कल्पना श्रीवास्तव, एसएनसेन कॉलेज की डॉ. निशा अग्रवाल को भी हटाया गया है।
अर्मापुर पीजी कॉलेज के डॉ. एसके दीक्षित (अर्थशास्त्र), जुहारी देवी कॉलेज की डॉ. बीना निगम और डॉ. नीता अग्रवाल की सुपरवाइजरी भी चली गई है।
एजूकेशन, एजूकेशन ट्रेनिंग और होम साइंस डिपार्टमेंट के सबसे ज्यादा टीचर्स हटाए गए हैं। कानपुर यूनिवर्सिटी 37 सब्जेक्ट में पीएचडी कराती है।
आर्डिनेंस में संशोधन से पहले 600 सुपरवाइजर थे लेकिन इसमें बदलाव के बाद यह संख्या 400 रह गई है। अब यही टीचर्स पीएचडी की सिनॉप्सिस, थीसिस तैयार कराके रिसर्च की गतिविधि को आगे बढ़ाएंगे।
इनकी भी हुई छुट्टी
पीपीएन के डॉ. एलके पांडेय (हिंदी), वीएसएसडी के डॉ. अरविंद सिंह, डीबीएस के डॉ. एससी श्रीवास्तव, डीएवी के डॉ. एमआर त्रिपाठी और डॉ. आरके आर्या, डीजी की डॉ. सुषमा रानी (सभी केमिस्ट्री), वीएसएसडी के डॉ. अरुण उपाध्याय और डॉ. एसबी गुप्ता, पीपीएन के डॉ. वैद्यनाथ गुप्ता, फिरोज गांधी रायबरेली के डॉ. आरबी श्रीवास्तव (सभी कामर्स), पीपीएन के डॉ. एसएन सिंह (अर्थशास्त्र), डीएवी की डॉ. दीपा राय (भूगोल), डॉ. वेदप्रकाश अग्रवाल और डॉ. इंद्रमोहन सहित अन्य।
‘‘अब परास्नातक कक्षा में पढ़ाने और पांच साल का अनुभव रखने वाले ही सुपरवाइजर बन सकेंगे। नई व्यवस्था के बाद स्नातक कक्षा में पढ़ाने वाले टीचर्स को सुपरवाइजर पद से हटना पड़ेगा।
यह सामान्य प्रक्रिया है। किसी को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से पीएचडी आर्डिनेंस में बदलाव नहीं किया गया है।’’
प्रो. जेवी वैशंपायन, कुलपति सीएसजेएम यूनिवर्सिटी