छत्रपति शाहूजी महाराज यूनिवर्सिटी से संबद्ध राजकीय और अनुदानित डिग्री कॉलेजों के टीचर्स की सीनियारिटी लिस्ट नहीं आई है, फिर भी प्रैक्टिकल एग्जाम, वायवा के लिए टीचर्स का एक्सपर्ट पैनल नामित कर दिया गया है।
इसमें सीनियारिटी का कोई जिक्र नहीं है। जिस सब्जेक्ट का जो टीचर मिला है, उसे प्रैक्टिकल, वायवा लेने के लिए भेज दिया है। इस मसले को लेकर कानपुर विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (कूटा) ने नाराजगी जताई है।
यूनिवर्सिटी कैंपस और 15 जिलों के संबद्ध डिग्री कॉलेजों के प्रैक्टिकल एग्जाम, वायवा 12 जनवरी से शुरू होंगे। शैक्षिक सत्र 2014-15 कर यह एग्जाम फरवरी अंत तक खत्म होना है। इसको देखते हुए ही यूनिवर्सिटी प्रशासन ने टीचर्स का एक्सपर्ट पैनल नामित कर दिया है।
डीएवी, डीबीएस और वीएसएसडी पीजी कॉलेज को सबसे ज्यादा पैनल मिले हैं। डीएवी में फिजिक्स, केमिस्ट्री, जूलोजी और बॉटनी के 100 से ज्यादा बैच लगते हैं।
नियमानुसार प्रैक्टिकल, वायवा में उन्हीं टीचर्स को भेजना चाहिए, जो कि सीनियारिटी लिस्ट में सबसे ऊपर हों, लेकिन कानपुर यूनिवर्सिटी में ऐसा नहीं हो रहा है। 1996 के बाद से ही डिग्री टीचर्स की सीनियारिटी फाइनल नहीं हुई है।
जून 2014 में प्रस्तावित लिस्ट वेबसाइट पर उपलब्ध कराई गई। 100 से ज्यादा आपत्तियां भी आईं, जिनका कि निस्तारण अभी तक नहीं हो सका है। मामला जहां का तहां फंसा है। इस मामले में एक कमेटी भी बनी है, जिसकी मीटिंग नहीं हो पा रही हैं।
कूटा अध्यक्ष डॉ. आरके सिंह और महामंत्री डॉ. देवेंद्र अवस्थी ने बताया कि कानपुर यूनिवर्सिटी प्रशासन कानून का अनुपालन नहीं कर रहा है। यूजीसी, राज्य विश्वविद्यालय और यूनिवर्सिटी अध्यादेश में सीनियारिटी लिस्ट से पेपर सेटिंग, प्रैक्टिकल और वायवा कराने की व्यवस्था है।
यह भी कहा गया है कि टीचर्स के नियुक्ति के अनुमोदन, मूल्यांकन, संबद्धता के पैनल निरीक्षण में भी सीनियर टीचर पहले लगाए जाएंगे। इसकी खुलेआम अनदेखी की जा रही है। इस मसले को लेकर 2 जनवरी को कुलपति प्रो. जेवी वैशंपायन से मुलाकात की जाएगी।
इसमें सीनियारिटी लिस्ट जल्द जारी और सीनियारिटी लिस्ट से प्रैक्टिकल, वायवा का एक्सपर्ट पैनल तैयार कराने की मांग की जाएगी।