कानपुर। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) अब आधुनिक तकनीक के जरिये खेती-किसानी को नया रूप देने जा रहा है। विश्वविद्यालय में नए सत्र से आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) और डेटा साइंस विषयों में बीटेक की पढ़ाई शुरू होगी। फिलहाल 40 सीटें निर्धारित की गई हैं। इस प्रस्ताव को विवि की एकेडमिक काउंसिल की बैठक में रखा जाएगा।
विश्वविद्यालय कृषि आधारित अनुसंधान को डिजिटल और डेटा-आधारित बनाने पर जोर दे रहा है। एआई और डेटा साइंस के जरिये किसान न केवल मौसम, मिट्टी और सिंचाई की सटीक जानकारी प्राप्त कर सकेंगे बल्कि फसलों की बीमारियों का समय रहते पता लगाया जा सकेगा।
इससे उत्पादन लागत घटेगी और पैदावार बढ़ेगी। विश्वविद्यालय के इटावा स्थित इंजीनियरिंग कॉलेज में इस कोर्स की शुरुआत नए सत्र से की जाएगी जिसकी तैयारियां चल रहीं हैं। एआई की मदद से स्मार्ट सिंचाई सिस्टम, ड्रोन सर्विलांस और क्रॉप हेल्थ मॉनिटरिंग जैसे प्रयोग किए जाएंगे। इससे खेतों में पानी और खाद का सही उपयोग होगा तथा बर्बादी को रोका जा सकेगा।
कुलपति प्रो. आनंद कुमार सिंह ने कहा कि विवि का लक्ष्य सिर्फ तकनीकी शिक्षा देना ही नहीं बल्कि इसकी मदद से खेती-किसानी को उन्नत और लाभदायक बनाना है। डेटा साइंस की तकनीक किसानों को फसल योजना बनाने, बाजार मूल्य का पूर्वानुमान लगाने और कृषि जोखिम प्रबंधन में मदद करेगी।
उन्होंने उदाहरण के तौर पर बताया कि किसी इलाके में पिछले दस सालों के मौसम और उत्पादन डेटा का विश्लेषण करके यह बताया जा सकेगा कि किस मौसम में कौन-सी फसल सबसे लाभदायक होगी।
इस नई पहल से न केवल छात्रों को उन्नत तकनीकी ज्ञान मिलेगा बल्कि किसान भी एआई और डेटा साइंस की मदद से अपनी खेती को लाभदायक, सुरक्षित और टिकाऊ बना सकेंगे।वीसी ने बताया कि सीएसए में छात्रों के लिए पहले ही 18 नए कोर्स शुरू किए जा चुके हैं जो कृषि, तकनीक और नवाचार को जोड़ते हैं। आने वाले समय में विश्वविद्यालय सिर्फ परंपरागत कृषि शिक्षा तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि एग्रीकल्चर 4.0 यानी डिजिटल खेती की दिशा में अग्रसर होगा।