कानपुर स्थित चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) के वैज्ञानिकों ने अलसी, मसूर, राई और तोरिया फसलों की चार नई प्रजातियां विकसित की हैं। बुधवार को लखनऊ स्थित कृषि निदेशालय में प्रमुख सचिव कृषि ने इन प्रजातियों का विमोचन किया।
विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी डॉ. खलील खान ने बताया कि मसूर की नई प्रजाति का विकास डॉ. मनोज कटियार ने किया है। इसे शेखर-8 नाम दिया गया है। मसूर की यह फसल बुंदेलखंड के किसानों के लिए काफी लाभदायक होगी। इसके दानों का आकार बड़ा होगा और रंग भूरा होगा। डॉ. कटियार ने बताया कि अगर इसकी समय से बुआई की जाए तो 16 से 18 कुंतल प्रति हेक्टेयर उपज होगी।
खास बात है कि 105 से 115 दिनों में ही यह फसल तैयार हो जाएगी। यह प्रजाति उकटा और रतुआ रोग रोधी भी है। डॉ. कटियार ने बताया कि अभी तक जो फसलें होती थीं उन्हें तैयार होने में 130 से 150 दिन लग जाते थे। चारों नई प्रजातियों को तैयार करने वाले वैज्ञानिकों को कुलपति प्रो. सुशील सोलोमन ने बधाई दी।