कानपुर स्थित चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के दलहन वैज्ञानिक डॉॅ. मनोज कटियार ने सोमवार को ग्रीष्मकालीन मूंग की बुवाई के लिए किसानों को एडवाइजरी जारी की। उन्होंने कहा कि मूंग की बुवाई 10 अप्रैल तक किसान अवश्य कर लें।
उत्तर प्रदेश में ग्रीष्मकालीन में लगभग 42000 हेक्टेयर में मूंग बोई जाती है, जिसमें कानपुर मंडल में लगभग 10829 हेक्टेयर है। ग्रीष्मकालीन मूंग में सबसे महत्वपूर्ण जल प्रबंधन एवं सिंचाई व्यवस्था होती है। किसान भाई मूंग की फसल में पहली सिंचाई बुवाई के 20 दिन पर करें।
तापमान के बढ़ने पर जरूरत के अनुसार पहले भी सिंचाई कर सकते हैं। प्रथम सिंचाई के बाद आवश्यकतानुसार 10 से 12 दिनों के अंतराल पर सिंचाई अवश्य करते रहें। गर्मी की मूंग की फसल में कुल तीन से चार सिंचाई की जरूरत होती है।
किसान यह याद रखें कि शाम के समय जब हवा ना चल रही हो तब सिंचाई करना चाहिए। गर्मी की मूंग 60 से 65 दिनों में पक कर तैयार हो जाती है। फसल कटाई या फलियों की तुड़ाई के 5 दिन पहले सिंचाई करना बंद कर दें।
विश्वविद्यालय के डॉ. खलील खान ने कहा कि मूंग की कटाई की अपेक्षा फलियों की तुड़ाई करना ज्यादा हितकारी होगा, क्योंकि फली तोड़ने के बाद फसल को खेत में ही रोटावेटर की सहायता से पलटने पर हरी खाद का काम करेगी तथा मृदा की उपजाऊ शक्ति में बढ़ोतरी होगी। सलाह दी कि खेती करते समय सामाजिक दूरी अवश्य बनाए रखें तथा हाथों को बार-बार साबुन से साफ करते रहें।