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साइबर फ्रॉड के जरिए बैंकों और एटीएम से पैसा चोरी करने वालों की खैर नहीं, तैयार हो रहा ये सॉफ्टवेयर

Mon, 17 Dec 2018 01:02 PM IST
शिखा पांडेय यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

- आईआईटी कानपुर में अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस, वैज्ञानिक बोले, बढ़ा साइबर अपराध
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विस्तार
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साइबर फ्रॉड के जरिए बैंकों और एटीएम से पैसा चोरी करने वालों पर लगाम लगाने की तैयारी वैज्ञानिकों ने शुरू कर दी हैं। यह सबकुछ क्रिप्टोलॉजी (कूट-लेखन) के जरिए संभव होगा।
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इसके जरिए दुनिया भर के साइबर वैज्ञानिक ऐसी तकनीक इजात कर रहे हैं, इससे साइबर फ्रॉड के दौरान ऑटोमेटिक सॉफ्टवेयर तैयार हो जाएगा और क्रिमिनल के मंसूबों पर पानी फेर देगा।

यह सॉफ्टवेयर न केवल वायरस को ऑटोमेटिक डिडेक्ट कर लेगा बल्कि उसे खत्म भी कर सकेगा। यह जानकारी रविवार को नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर से आए साइबर वैज्ञानिक प्रो. अभिक राय चौधरी ने दी।
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वह यहां आईआईटी कानपुर में इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ क्रिप्टोलॉजी रिसर्च (आईएसीआर) और क्रिप्टोलॉजी रिसर्च सोसाइटी ऑफ इंडिया (सीआरएसआई) की ओर से आयोजित अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।

डेमो पिक
उन्होंने बताया कि डिजिटलाइज्ड लेनदेन और ऑनलाइन डाटा ने साइबर फ्राड को कई गुना बढ़ा दिया है। अब अपराधिक घटनाएं भी ऑनलाइन हो रही हैं। हैकर बिना हथियार के करोड़ों रुपए लूट लेता है तो सरकारों को भी तकनीकी और आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचाता है। एक वायरस के जरिए पूरा डाटा हैक कर लेता है।

हमारी गलती का फायदा उठाते हैं हैकर
दूसरे सत्र में आईआईटी कानपुर के कम्प्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के हेड और साइबर एक्सपर्ट प्रो. संदीप शुक्ला ने साइबर सिक्योरिटी के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि साइबर फ्रॉड काफी हद तक हमारी गलती से होता है।

इसलिए सभी को जागरूक होना जरूरी है। साथ ही साइबर सिक्योरिटी के इंफ्रास्टक्चर को भी क्रिटिकल बनाया जाना चाहिए, जिसे तोड़ पाना आसान न हो।
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डेमो पिक
मालवेयर ने सभी देशों को किया परेशान
तीसरे सत्र में डॉ. आशु शर्मा ने मालवेयर एनालिसिस के बारे में जानकारी दी। इसी वायरस के जरिए सबसे अधिक हैकिंग की घटनाएं हुई हैं। डॉ. शर्मा ने कहा कि इस वायरस ने दुनिया के सभी देशों को परेशान कर दिया।

हैकर इन वायरस का प्रयोग इंटरनेट के जरिए सभी की ई-मेल पर भेजते हैं, जो इसके लालच में पड़ता है, उसका डाटा बड़ी आसानी से हैक हो जाता है। यह इंटरनेशनल कांफ्रेंस पिछले वर्ष गोवा में और इससे पहले हैदराबाद और जयपुर में हुई थी।
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