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...तो बैंकिंग धोखाधड़ी में ऐसे हो रहा है ई-वालेट का इस्तेमाल  

Mon, 26 Dec 2016 12:07 PM IST
ऋषभ मणि त्रिपाठी, अमर उजाला, कानपुर  

सार

बिठूर के एक मामले में पुलिस की जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए 
जालसाज ने फर्जी दस्तावेजों से लिए गए सिमकार्ड पर एप डाउनलोड कर किया खेल
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विस्तार
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हाइटेक जालसाजों ने अब पेटीएम जैसे एप के ई-वालेट से ठगी करना शुरू कर दिया है। बिठूर के एक मामले की जांच में पुलिस को जो तथ्य पता चले हैं, वे चौंकाने वाले हैं। जालसाज ने फर्जी पते पर लिए गए सिम पर एप को डाउनलोड करने के बाद पीड़ित के बैंक खाते से ई-वालेट पर रुपये भरे और खरीदारी कर ली। पीड़ित को इसका पता भी नहीं चल सका क्योंकि जिन दिनों उसके खाते से रुपये निकाले गए उतने समय के लिए उसका सिम ब्लॉक रहा। इस कारण बैंक से मैसेज भी नहीं आ पाए।
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डेमो
नोटबंदी से पहले तक साइबर अपराधी ऑनलाइन रकम उड़ाकर फर्जी आईडी से खोले गए बैंक खाते में ट्रांसफर करते थे। फिरडेबिट कार्ड का इस्तेमाल कर एटीएम से रकम निकाल लेते थे। नोटबंदी के बाद एटीएम से रकम निकालने की सीमा तय होते ही ये लोग अब पेटीएम जैसे एप्स पर निगाह गड़ाए हैं। बिठूर के टिकरा गांव निवासी प्राइवेटकर्मी अजीत राठौर के एसबीआई के खाते से 10 दिसंबर को 29 हजार रुपये पेटीएम के ई-वालेट पर ट्रांसफर किए गए। फिर उस ई-वालेट से कई जगह भुगतान किया गया। खाते से रुपये उड़ाने के दौरान उनका सिमकार्ड ब्लाक हो गया था। 22 दिसंबर को बैंक की पासबुक में इंट्री कराने पर उन्हें इस जालसाजी का पता चला। पुलिस ने जब पेटीएम वाले मोबाइल नंबर की जांच की तो वह फर्जी आईडी से लिया गया सिम निकला। 

 

10 हजार तक नहीं देनी होती है केवाईसी

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पेटीएम से छोटी खरीदारी (10 हजार तक) में रकम ट्रांसफर के लिए किसी केवाईसी (नो योर कस्टमर) की जरूरत नहीं होती है। 20 हजार से ऊपर की खरीदारी के लिए केवाईसी भरना पड़ता है। साइबर क्राइम के खिलाड़ियों ने इसी का फायदा उठाया। फर्जी आईडी से सिम लेकर पेटीएम एक्टिवेट किया गया। पेटीएम के वालेट में रुपये भरने के लिए डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या बैंक अकाउंट का ऑप्शन आता है। आरोपी के पास अजीत के खाते की डिटेल रही होगी। उसने बैंक अकाउंट से दस बार में 29 हजार रुपये निकालकर खाता साफ कर दिया। फिर ई-वालेट से कई जगह खरीदारी की। 

 
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ऐसे बचें, इस तरह की जालसाजी से  

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अपने बैंक खाते की डिटेल किसी को भी न बताएं। पासबुक, चेकबुक संभाल कर रखें। 
खाता नंबर, कस्टमर आईडी, पासवर्ड, पिनकोड को मोबाइल मेें सेव न करें।
यह परंपरा भी गलत है कि अपना डेबिट कार्ड देकर किसी को एटीएम से पैसे निकालने भेजें, कार्ड के पीछे सीवीवी नंबर बेहद गोपनीय होता है।
फोन बदलते समय उसका पूरा डाटा उड़ा दें। इसके लिए फोन पर फैक्ट्री रिसेट का ऑप्शन होता है। 
खाते में ट्रांजेक्शन संबंध मैसेज के लिए बैंक में दो फोन नंबर रजिस्टर कराएं। ताकि एक सिम के बंद होने पर दूसरे पर मैसेज मिल सके। 
सिम अपने आप बंद हो तो कंपनी को तुरंत सूचना दें। पता करें कि किस कारण से सिम ब्लॉक हुआ।
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